बड़ी जीत: होर्मुज की बाधा पार कर भारत के लिए सुरक्षित निकला विशाल LNG टैंकर, देश में ऊर्जा संकट होगा खत्म

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान की तनातनी ने मिडिल ईस्ट के समंदर को बारूद के ढेर में बदल दिया है। पूरी दुनिया सांसें रोककर बैठी है कि कब कौन सी मिसाइल तेल के बाजार में आग लगा दे। लेकिन इस खौफनाक और दमघोंटू माहौल के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने भारत की टेंशन छूमंतर कर दी है। जी हां, दुनिया के सबसे खतरनाक और विवादित समुद्री रास्ते ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से एक ऐसा चमत्कार हुआ है, जिसकी उम्मीद कम ही लोग कर रहे थे। युद्ध की आहट के बाद पहली बार प्राकृतिक गैस (LNG) से लदा एक भीमकाय जहाज इस ‘मौत के समंदर’ को चीरते हुए सुरक्षित बाहर निकल आया है।

खाड़ी में फंसा ‘मुबाराज़’ जहाज भारतीय सीमा के पास दिखा
जहाजों के आवाजाही की जानकारी देने वाले ट्रैकिंग डेटा ने एक बड़ा खुलासा किया है। सोमवार को ‘मुबाराज़’ नाम के इस विशाल जहाज को भारतीय समुद्री क्षेत्र के आस-पास देखा गया है। इस जहाज में मार्च के महीने में ही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दास द्वीप संयंत्र से एलएनजी भरी गई थी। लेकिन, अचानक युद्ध भड़कने के कारण यह जहाज खाड़ी क्षेत्र में ही बुरी तरह फंस गया था। हालात इतने खराब हो गए थे कि लगभग 31 मार्च को इस जहाज ने अपने सिग्नल भेजने तक बंद कर दिए थे। अब इस सप्ताह भारतीय जलक्षेत्र के करीब इसके दोबारा दिखने से यह उम्मीद जगी है कि दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्ग पर तनाव कुछ कम हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, मुबाराज़ जहाज फिलहाल चीन की ओर बढ़ रहा है और मई के पहले सप्ताह में इसके भारत पहुंचने की पूरी संभावना है।

आखिर एलएनजी क्या है और होर्मुज पर क्यों मचा है कोहराम?
एलएनजी यानी द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (Liquefied Natural Gas) भारत की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ मानी जाती है। प्राकृतिक गैस को -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके तरल रूप में बदला जाता है, जिससे इसका आयतन काफी कम हो जाता है और जहाजों के जरिए इसे लंबी दूरी तक सुरक्षित ले जाना आसान हो जाता है। हालांकि इसका सीधा इस्तेमाल घरों में नहीं होता, लेकिन यह देश की पूरी गैस आपूर्ति प्रणाली को ऊर्जा प्रदान करने का काम करती है। हाल ही में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सभी व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी हड़कंप मचा दिया था। इसके जवाब में अमेरिका ने भी इस अहम मार्ग पर कड़ी नाकाबंदी कर दी थी। आपको बता दें कि यह वही रास्ता है जहां से पूरी दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत (एक-पांचवीं) एलएनजी की सप्लाई होती है।
