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2,000 समलैंगिक यात्रियों वाला क्रूज समुद्र में भटका, तुर्किए के बाद मिस्र ने भी बंदरगाह पर उतरने की नहीं दी अनुमति

न्यूयॉर्क: एथेंस से वेनिस की 10 दिवसीय यात्रा पर निकला क्रूज शिप स्कारलेट लेडी अप्रत्याशित मुश्किलों में घिर गया है। करीब 2,000 समलैंगिक यात्रियों को लेकर सफर कर रहे इस जहाज को पहले तुर्किए और अब मिस्र ने भी अपने बंदरगाह पर लंगर डालने और यात्रियों को उतरने की अनुमति नहीं दी है। इसके बाद क्रूज संचालक अब किसी वैकल्पिक बंदरगाह की तलाश में जुट गए हैं।

बताया गया है कि इस विशेष यात्रा में ‘वर्जिन वॉयजेज’ और एलजीबीटीक्यू+ यात्राओं का आयोजन करने वाली ‘अटलांटिस’ की टीमें भी शामिल हैं। तुर्किए ने पहले पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों का हवाला देते हुए जहाज को प्रवेश देने से इनकार किया था। इसके बाद मिस्र ने भी जहाज को अपने बंदरगाह पर रुकने की अनुमति नहीं दी।

कलाकार पैटी लुपोन ने जताई नाराजगी

रिपोर्ट के अनुसार, इस क्रूज यात्रा में ब्रॉडवे की प्रसिद्ध कलाकार पैटी लुपोन भी मौजूद हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि तुर्किए से अनुमति नहीं मिलने के बाद सभी को उम्मीद थी कि मिस्र में जहाज रुक सकेगा, लेकिन वहां से भी अनुमति नहीं मिली। उन्होंने कहा कि फिलहाल यात्रियों को यह भी स्पष्ट नहीं है कि जहाज अब किस बंदरगाह की ओर जाएगा।

कंपनी ने फैसले पर जताई है हैरानी

यात्रा का आयोजन करने वाली कंपनी अटलांटिस इवेंट्स ने मिस्र के फैसले पर आश्चर्य जताया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिच कैंपबेल ने कहा कि इससे पहले इसी प्रकार की यात्रा के दौरान मिस्र में किसी तरह की परेशानी नहीं हुई थी। उनके मुताबिक, इस बार अलेक्जेंड्रिया में कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी थी, लेकिन अंतिम समय में अनुमति नहीं दी गई, जिससे यात्रियों और आयोजकों में निराशा है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, स्कारलेट लेडी क्रूज का संचालन वर्जिन वॉयजेज करता है। एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के लिए यात्रा कार्यक्रम आयोजित करने वाली अटलांटिस इवेंट्स ने इस जहाज के जरिए एथेंस से वेनिस तक विशेष यात्रा का आयोजन किया था। तय कार्यक्रम के अनुसार जहाज को तुर्किए के दो बंदरगाहों पर रुकना था, लेकिन वहां अनुमति नहीं मिली। इसके बाद जहाज ने मिस्र का रुख किया, जहां से भी प्रवेश की मंजूरी नहीं दी गई।

तुर्किए ने बताया अपना पक्ष

तुर्किए के अधिकारियों ने कहा कि संबंधित क्रूज ऐसे समूह द्वारा चार्टर किया गया है, जिसे लेकर स्थानीय समाज में चिंता पैदा हुई थी। इसी आधार पर जहाज को बंदरगाह पर रुकने की अनुमति नहीं दी गई। वहीं, मिस्र की ओर से अब तक इस फैसले पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों देशों में समलैंगिक समुदाय से जुड़े मुद्दों पर अपेक्षाकृत सख्त नीतियां लागू हैं।

 

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