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बीबीएयू में जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा हुआ व्याख्यान सत्र एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन , विशेषज्ञों ने बेहतर स्वास्थ्य पर दिया जोर

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 5 मई को जैव प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से व्याख्यान सत्र एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ‘अंतर्राष्ट्रीय इम्यूनोलॉजी दिवस’ को ध्यान में रखकर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान के चीफ साइंटिस्ट डॉ. मुकेश पसुपुलेटी उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त विशिष्ट अतिथि के तौर पर संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के डॉ. रवि शंकर सिंह, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष प्रो. डी.आर. मोदी एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. जी. सुनील बाबू उपस्थित रहे। सर्वप्रथम डॉ. जी. सुनील बाबू ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का स्वागत किया एवं सभी को कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रुपरेखा से अवगत कराया।
मुख्य अतिथि एवं केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान के चीफ साइंटिस्ट डॉ. मुकेश पसुपुलेटी ने अपने संबोधन में सभी को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि मानव शरीर अत्यंत अमूल्य धरोहर है, इसलिए इसकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी हमें स्वयं समझदारी से निभानी चाहिए। उन्होंने प्रतिरक्षा तंत्र के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बदलती जीवनशैली और बढ़ते रोगों के इस दौर में अपनी इम्युनिटी को मजबूत बनाए रखना बेहद आवश्यक है। डॉ. पसुपुलेटी ने बताया कि संतुलित और पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, स्वच्छता और सकारात्मक सोच न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं बल्कि मानसिक संतुलन भी बनाए रखते हैं। साथ ही, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच और जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, क्योंकि एक स्वस्थ शरीर ही एक सफल और सुखद जीवन की नींव होता है।
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के डॉ. रवि शंकर सिंह ने बताया कि मनुष्य एकमात्र ऐसा प्राणी है जो दिन के 24 घंटे कभी भी भोजन कर सकता है, जबकि अन्य अधिकांश प्रजातियों में भोजन का एक निश्चित समय और पैटर्न होता है। उन्होंने कहा कि आज की अनियमित जीवनशैली और बार-बार बिना आवश्यकता के खाने की आदत के कारण ही जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन समस्याओं से बचने के लिए हमें अपने खाने के समय और मात्रा दोनों पर नियंत्रण रखना होगा। उन्होंने संतुलित आहार, समयबद्ध भोजन, जंक फूड से परहेज और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनाने पर जोर दिया। साथ ही डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि संतुलित आहार न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि पाचन तंत्र को मजबूत कर संपूर्ण जीवन गुणवत्ता में सुधार लाता है, इसलिए सभी को सजग होकर अपनी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास क
विभागाध्यक्ष प्रो. डी. आर मोदी ने कहा कि हम सभी को विभिन्न बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक टीकों के प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि समय पर लगाया गया टीकाकरण कई गंभीर रोगों से हमारी रक्षा करता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य से संबंधित सभी रिकॉर्ड जैसे टीकाकरण विवरण, मेडिकल रिपोर्ट्स और नियमित जांच सही तरीके से सुरक्षित रखनी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत उपयोग किया जा सके। उन्होंने आगे जोर देते हुए कहा कि जागरूकता, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता का पालन और संतुलित जीवनशैली अपनाकर हम न केवल स्वयं को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि समाज को भी स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. जी. सुनील बाबू ने चर्चा के दौरान कहा कि विभाग के माध्यम से समय-समय पर न केवल विद्यार्थियों बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी स्वास्थ्य और जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक करने का कार्य निरंतर किया जाता है। उन्होंने बताया कि विभिन्न प्रतियोगिताओं, गतिविधियों और सहभागितापूर्ण कार्यक्रमों के जरिए बच्चों को सक्रिय रूप से जोड़ा जाता है, जिससे वे रुचि के साथ सीखते हैं और जागरूकता का संदेश प्रभावी ढंग से फैलता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के प्रयास न केवल ज्ञानवर्धन करते हैं, बल्कि युवाओं में जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हुए उन्हें एक स्वस्थ और सजग समाज के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।
इस अवसर पर विद्यार्थियों की रचनात्मकता और प्रतिभा को प्रोत्साहित करने हेतु जूनियर एवं सीनियर वर्गों में पोस्टर मेकिंग, रंगोली, क्विज तथा मॉडल प्रतियोगिताओं का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपने कौशल और नवाचार का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सभी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को समापन सत्र के दौरान प्रशस्ति पत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बीबीएयू एवं विभिन्न विद्यालयों से आये शिक्षक, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी, प्रतिभागी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

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