“राजनीतिक दबाव नहीं, कानून और न्याय के आधार पर करें काम”, राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय कुमार सिंह की अपील

लखनऊ: राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और न्याय प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कई मामलों में पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों का भरोसा प्रभावित हो रहा है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से कानून के दायरे में रहकर निष्पक्ष तरीके से कार्य करने की अपील की।

‘पीड़ितों को समय पर मिले न्याय’
अजय कुमार सिंह ने कहा कि पीड़ितों की सबसे बड़ी अपेक्षा यही होती है कि प्रशासनिक अधिकारी कानून का पालन करते हुए उन्हें त्वरित और निष्पक्ष न्याय उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारियों के जनता दर्शन कार्यक्रमों और संपूर्ण समाधान दिवसों में लगातार बढ़ रही फरियादियों की संख्या इस बात का संकेत है कि स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं का प्रभावी समाधान नहीं हो पा रहा है।
‘राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर लें निर्णय’
राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के अध्यक्ष ने कहा कि अधिकारियों को किसी भी राजनीतिक दबाव या प्रभाव में आए बिना केवल कानून और संविधान के अनुरूप निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्णय किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक हस्तक्षेप के आधार पर नहीं, बल्कि तथ्यों और विधिक प्रावधानों के अनुसार होने चाहिए।
‘कानून की नजर में सभी बराबर’

उन्होंने कहा कि समाज में कई बार प्रभावशाली और संपन्न लोग व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कानून की नजर में हर नागरिक समान है। अधिकारियों को किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति का पक्ष लेने के बजाय निष्पक्ष रहकर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
मानवाधिकारों की रक्षा के लिए निष्पक्षता जरूरी
अजय कुमार सिंह ने कहा कि अधिकारियों की पहली जिम्मेदारी देश के कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति है। उनका हर निर्णय सत्य और कानून के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब प्रशासन निष्पक्ष रहेगा, तभी समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के मानवाधिकारों की प्रभावी रक्षा संभव होगी।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर दिया जोर
राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि संगठन का प्रमुख होने के नाते उन्होंने यह मुद्दा इसलिए उठाया है क्योंकि प्रशासनिक निष्पक्षता में कमी आने पर मानवाधिकारों का हनन होता है। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि इससे सरकारी तंत्र और न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
