Friday, July 31, 2026
Latest:
राज्य

पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था छोड़ कारोबार में व्यस्त? इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, डीजीपी को 10 दिन में कार्रवाई का आदेश

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि यदि पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था संभालने के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों में लगे रहेंगे तो व्यवस्था बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। कोर्ट ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को बलिया के रसड़ा थाने की गतिविधियों की जांच कर सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

अदालत ने पुलिस महानिदेशक और उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया कि रसड़ा थाने में तैनात सभी पुलिस अधिकारियों और कांस्टेबलों की भूमिका की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही डीजीपी को 10 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई का विवरण हलफनामे के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है।

ट्रक ब्लैकलिस्ट करने के मामले की सुनवाई में सामने आया विवाद

यह आदेश हरेंद्र यादव के ट्रक को एआरटीओ बलिया द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने से संबंधित याचिका की सुनवाई के दौरान दिया गया। ट्रक को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई एक उपनिरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर की गई थी। मामला याचिकाकर्ता और रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार के बीच ट्रक के मालिकाना हक के विवाद से जुड़ा था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कांस्टेबल से भी बातचीत की। कांस्टेबल ने बताया कि उसने अपने जीपीएफ खाते से राशि निकालकर अपने भाई के नाम पर याचिकाकर्ता के साथ परिवहन व्यवसाय शुरू किया था। इसी दौरान एक ट्रक खरीदा गया, जिसे याचिकाकर्ता चलाता था।

एआरटीओ की कार्रवाई और एसपी के हलफनामे पर कोर्ट की टिप्पणी

अदालत ने पाया कि एआरटीओ ने मालिकाना हक के विवाद में उपनिरीक्षक शिवमूर्ति तिवारी की रिपोर्ट के आधार पर वाहन को ब्लैकलिस्ट किया था। वहीं बलिया के पुलिस अधीक्षक द्वारा दाखिल हलफनामे में यह उल्लेख नहीं था कि थाने में तैनाती के दौरान परिवहन व्यवसाय करने के आरोप में संबंधित कांस्टेबल के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई की गई हो।

‘थाने व्यवसायिक गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे’

न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत इस स्थिति से हैरान है कि थाने व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे हैं और पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के बजाय कारोबार में व्यस्त दिखाई दे रहे हैं। अदालत ने कहा कि यदि ऐसी स्थिति जारी रही तो प्रभावी कानून-व्यवस्था बनाए रखना संभव नहीं होगा।

थानेदार और एसपी पर भी उठाए सवाल

अदालत ने यह भी कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और हलफनामों से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि रसड़ा थाने के प्रभारी और बलिया के पुलिस अधीक्षक ने संबंधित कांस्टेबल के पक्ष में रिपोर्ट देकर उसे बचाने का प्रयास किया। इसी रिपोर्ट के आधार पर एआरटीओ ने संबंधित ट्रक को ब्लैकलिस्ट कर उसके हस्तांतरण पर रोक लगा दी थी।

डीजीपी को व्यापक जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने डीजीपी को रसड़ा थाने में कथित व्यावसायिक गतिविधियों की विस्तृत जांच कराने और वहां तैनात सभी पुलिस अधिकारियों तथा कांस्टेबलों के खिलाफ नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।

 

---------------------------------------------------------------------------------------------------