धरने के अगले दिन डिप्टी सीएम से मिले SM NET कर्मी, सेवा बहाली की मांग पर बृजेश पाठक ने दिए त्वरित कार्रवाई के निर्देश

लखनऊ : सोशल मोबिलाइजेशन नेटवर्क (एसएम नेट) उत्तर प्रदेश के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात कर समन्वयकों की सेवा बहाली की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांग को प्रमुखता से उठाया, जिस पर उपमुख्यमंत्री ने गंभीरता दिखाते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। इससे पहले लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेशभर के समन्वयकों और बीएमसी साथियों ने धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की थी।

स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान का दिया हवाला
धरने के दौरान वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्ष 2001 में यूनिसेफ द्वारा सोशल मोबिलाइजेशन नेटवर्क (एसएम नेट) की स्थापना की गई थी। वक्ताओं के अनुसार इस नेटवर्क ने पोलियो उन्मूलन, दस्तक एवं संचारी रोग नियंत्रण अभियान, कोविड-19 प्रबंधन, दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, टीकाकरण कार्यक्रम, मिशन इंद्रधनुष, ग्रामीण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अभियान तथा पोषण दिवस जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
555 कर्मचारियों के सामने खड़ा हुआ आजीविका का संकट
कर्मचारियों ने बताया कि 31 मार्च 2026 को यूनिसेफ द्वारा एसएम नेट को बंद किए जाने के निर्णय के बाद प्रदेश के लगभग 555 कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो गया है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने फरवरी 2026 में एसएम नेट के संचालन के लिए विशेष बजट का प्रावधान भी किया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक नेटवर्क के पुनर्संचालन को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।
कर्मचारियों के अनुसार अप्रैल माह में धरना-प्रदर्शन किए गए, अपर मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) के साथ बैठक हुई तथा मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई नहीं हो सकी।
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स्वास्थ्य विभाग पर लगाया शिथिलता का आरोप
धरनारत कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग की शिथिलता और लालफीताशाही के कारण आज तक एसएम नेट के पुनर्संचालन और कर्मचारियों के पुनर्नियोजन को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने शासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर नेटवर्क को दोबारा संचालित करने और प्रभावित कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की।
कर्मचारियों ने बताया कि धरने के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने स्वास्थ्य महानिदेशक को भी अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा था, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के बाद उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से मुलाकात कर पुनः ज्ञापन दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
उपमुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में डॉ. राजेश सिंह, योगेश सिंह, हर्षित राज, ज्ञानेन्द्र कुमार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

