उत्तर प्रदेशदेश

जिस IAS अधिकारी को आजम खान ने कहा था ‘तनखैय्या’, अब उसी के सामने पहुंचेगा जौहर यूनिवर्सिटी का मामला

रामपुर: रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने इस मामले को नई चर्चा दे दी है। वर्ष 2019 में तत्कालीन जिलाधिकारी रहे आईएएस अधिकारी आन्जनेय सिंह को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने सार्वजनिक रूप से ‘तनखैय्या’ कहा था। अब वही अधिकारी मुरादाबाद मंडल के आयुक्त और रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के अध्यक्ष के रूप में जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी संभावित अपील की सुनवाई करेंगे। ऐसे में यूनिवर्सिटी का भविष्य काफी हद तक आरडीए के निर्णय पर निर्भर माना जा रहा है।

38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का नोटिस

जौहर यूनिवर्सिटी के 40 भवनों में से 38 को ध्वस्तीकरण नोटिस जारी होने के बाद मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। कार्रवाई की आशंका के बीच राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।

यूनिवर्सिटी को बचाने की कोशिश में जुटे जनप्रतिनिधि

समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने रामपुर पहुंचकर जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि वह हिंदू और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और इस मुद्दे पर समर्थन जुटाने का प्रयास करेंगे। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी ध्वस्तीकरण नोटिस को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

2019 की टिप्पणी फिर बनी चर्चा का विषय

वर्ष 2019 में तत्कालीन रामपुर जिलाधिकारी रहे आईएएस अधिकारी आन्जनेय सिंह को लेकर आजम खान ने सार्वजनिक मंच से तीखी टिप्पणी की थी और उन्हें ‘तनखैय्या’ कहा था। अब वही आन्जनेय सिंह मुरादाबाद मंडल के आयुक्त होने के साथ-साथ रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं। यदि जौहर यूनिवर्सिटी की ओर से ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ अपील दायर की जाती है तो उसकी सुनवाई आरडीए अध्यक्ष के रूप में उनके समक्ष होगी।

नियमितीकरण पर आ सकता है भारी खर्च

विषय से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि यदि यूनिवर्सिटी की इमारतों के नक्शों का नियमितीकरण कराने की प्रक्रिया अपनाई जाती है तो इस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आ सकता है। हालांकि यह किसी सरकारी एजेंसी का आधिकारिक आंकड़ा नहीं, बल्कि विशेषज्ञों का आकलन बताया जा रहा है।

आजम खान के सामने बताए जा रहे तीन विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, इस मामले में आजम खान के सामने तीन प्रमुख कानूनी और प्रशासनिक विकल्प मौजूद हैं। पहला, रामपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से 38 भवनों के नक्शों का कंपाउंडिंग कराकर उन्हें नियमित कराने का प्रयास करना, जिसके लिए विभिन्न प्रकार के शुल्क जमा करने पड़ सकते हैं।

दूसरा विकल्प उच्च न्यायालय का रुख करना है। हालांकि जानकारों का कहना है कि यदि भवनों का नियमितीकरण आवश्यक हुआ तो प्रक्रिया अंततः रामपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से ही पूरी करनी होगी।

तीसरा विकल्प यह बताया जा रहा है कि मुरादाबाद मंडल के आयुक्त और आरडीए अध्यक्ष आन्जनेय सिंह के समक्ष आवेदन देकर ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध किया जाए।

प्रशासनिक फैसले पर टिकीं सभी की नजरें

जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर जारी विवाद के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है। संभावित अपील और उसके बाद होने वाली कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है।

 

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