राम मंदिर से पहले देश के इन बड़े मंदिरों में भी लागू है CEO सिस्टम! जानिए कौन संभालता है प्रशासन और कैसे चलता है प्रबंधन
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की अहम बैठक में राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ की नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है। रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है। राम मंदिर में सीईओ की नियुक्ति के साथ ही मंदिर प्रशासन में धार्मिक नेतृत्व और रोजमर्रा के प्रबंधन की जिम्मेदारियों को अलग-अलग करने की व्यवस्था शुरू होगी। हालांकि, देश के कई बड़े मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में ऐसी व्यवस्था पहले से लागू है।
कई बड़े तीर्थों में अलग अधिकारी संभालते हैं प्रशासन

देश के बड़े धार्मिक संस्थानों में नीतिगत फैसलों और रोजमर्रा के प्रशासन की जिम्मेदारी अलग-अलग स्तर पर होती है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में सीईओ, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में सीईओ और पुरी जगन्नाथ मंदिर में चीफ एडमिनिस्ट्रेटर मुख्य प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते हैं। बोर्ड या समिति नीतिगत फैसले लेती है, जबकि पेशेवर अधिकारी इन फैसलों को जमीन पर लागू करने के साथ वित्त, श्रद्धालुओं की सुविधाओं, सुरक्षा और रोजमर्रा के संचालन का काम देखते हैं।
तिरुपति में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के हाथ में कमान
आंध्र प्रदेश का तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम इस व्यवस्था का प्रमुख उदाहरण है। यहां मुख्य प्रशासनिक पद का नाम सीईओ के बजाय एग्जीक्यूटिव ऑफिसर है। आधिकारिक तौर पर यही अधिकारी टीटीडी का मुख्य कार्यकारी होता है। उसके साथ दो ज्वाइंट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर, चीफ विजिलेंस एंड सिक्योरिटी ऑफिसर, वित्त एवं लेखा अधिकारी और मुख्य अभियंता जैसे अधिकारी काम करते हैं। इस व्यवस्था में बोर्ड नीतिगत स्तर पर फैसले करता है, जबकि दैनिक प्रशासन पेशेवर अधिकारियों के जरिए संचालित होता है।
बदरीनाथ-केदारनाथ में CEO के अधीन अधिकारी
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में भी सीईओ प्रशासन का प्रमुख होता है। समिति की वेबसाइट पर सीईओ के साथ अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की अलग व्यवस्था दर्ज है। दोनों प्रमुख धामों के प्रशासन से जुड़े अधिकारी सीईओ के अधीन काम करते हैं। यहां धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं अलग-अलग स्तर पर संचालित होती हैं। वर्ष 2026 में चढ़ावे से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतों की जांच के लिए समिति ने चार सदस्यीय पैनल बनाया था। इसके बाद सरकार ने जांच में सामने आए अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश सीईओ को दिए।
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पुरी जगन्नाथ मंदिर में CEO नहीं, चीफ एडमिनिस्ट्रेटर
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी का पद सीईओ के नाम से नहीं, बल्कि चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर है। कानून के तहत यही अधिकारी मंदिर प्रबंध समिति के सचिव और उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी की भूमिका निभाता है। मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, धन और आभूषणों की सुरक्षित अभिरक्षा, श्रद्धालुओं को सुविधाएं, अनुशासन, स्वच्छता और मंदिर की संपत्तियों के प्रबंधन जैसी अहम जिम्मेदारियां इसी अधिकारी के पास होती हैं।
राम मंदिर में CEO की भूमिका क्यों अहम
राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति के बाद अब मंदिर की रोजमर्रा की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक अलग पेशेवर अधिकारी की भूमिका तय होगी। इससे धार्मिक नेतृत्व और प्रशासनिक कामकाज को अलग-अलग जिम्मेदारियों के तहत संचालित करने की व्यवस्था बनेगी। जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति इसी प्रशासनिक ढांचे की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है।

