Thursday, September 3, 2026
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भारत की GDP पर सवाल उठाने वालों को पीयूष गोयल का करारा जवाब! बोले- ‘सेब की तुलना सेब से करो’, 7.8% ग्रोथ को लेकर समझाया पूरा गणित

नई दिल्ली: भारत की जीडीपी वृद्धि दर को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आलोचकों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि नकारात्मक बातें करने वाले लोग 7.8 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि को लेकर भ्रम पैदा कर रहे हैं। गोयल के मुताबिक आलोचक पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखला के आंकड़ों की तुलना कर रहे हैं, जबकि दोनों के आधार वर्ष अलग हैं। उन्होंने कहा कि सही तुलना के लिए ‘सेब की तुलना सेब से’ करनी चाहिए।

पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही आर्थिक वृद्धि

संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। पीयूष गोयल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद भारत बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत की स्थिति को ‘रेगिस्तान में नखलिस्तान’ जैसी बताते हुए कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि वास्तविकता है।

पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखला को लेकर क्या बोले गोयल?

पीयूष गोयल ने कहा कि कुछ विपक्षी नेता, पूर्व वित्त सचिव और पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर तक जीडीपी के आंकड़ों पर सवाल उठा रहे हैं। उनके मुताबिक ऐसे आलोचक पुरानी जीडीपी श्रृंखला की वृद्धि दर को नई श्रृंखला के आंकड़ों से जोड़कर तुलना कर रहे हैं। गोयल ने कहा कि नई श्रृंखला में आधार वर्ष ही बदल गया है, इसलिए इस तरह की तुलना से जनता को गुमराह किया जा रहा है।

रोजगार के सवाल पर भी दिया जवाब

जीडीपी के आंकड़ों पर सवाल उठाने वालों की ओर से यह भी पूछा जा रहा है कि अगर अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है तो रोजगार कहां हैं। इस पर पीयूष गोयल ने कपड़ा क्षेत्र में श्रमिकों की मजबूत मांग का हवाला दिया। उन्होंने तिरुपुर के उद्योग का जिक्र करते हुए कहा कि वहां एक लाख लोग भेज दिए जाएं तो उन्हें काम दिया जा सकता है।

पुरानी और नई जीडीपी श्रृंखला में क्या अंतर है?

पुरानी जीडीपी श्रृंखला में 2011-12 को आधार वर्ष माना गया था। फरवरी 2026 से लागू नई श्रृंखला में आधार वर्ष बदलकर 2022-23 कर दिया गया है। सरकार के अनुसार आधार वर्ष में बदलाव के साथ आंकड़ों के स्रोत और गणना पद्धति को भी बेहतर किया गया है।

पिछले साल के आंकड़ों में बदलाव क्यों हुआ?

सरकार का कहना है कि जीडीपी के आंकड़ों में संशोधन सामान्य सांख्यिकीय प्रक्रिया का हिस्सा है। नई आधार श्रृंखला, बेहतर आंकड़ा स्रोत, नई आईआईपी और पीपीआई श्रृंखला तथा अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध होने के बाद पुराने अनुमानों में संशोधन किया गया है।

7.8 प्रतिशत वास्तविक वृद्धि कैसे निकली?

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आर्थिक वृद्धि की गणना स्थिर कीमतों पर की जाती है। इससे कीमतों में बदलाव के प्रभाव को अलग करके वास्तविक उत्पादन में हुई वृद्धि का आकलन किया जाता है। अप्रैल से जून की तिमाही में इस्पात, सीमेंट और वाहनों सहित कई क्षेत्रों के उत्पादन में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जिसके आधार पर वास्तविक वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही।

विनिर्माण क्षेत्र के आंकड़ों पर भी उठे सवाल

विनिर्माण क्षेत्र का वास्तविक सकल मूल्य वर्धन 9.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि मौजूदा कीमतों पर वृद्धि 7.7 प्रतिशत रही। सरकार के अनुसार डबल-डिफ्लेशन पद्धति में उत्पादन और कच्चे माल की कीमतों को अलग-अलग समायोजित किया जाता है। ऐसे में यदि कच्चे माल की कीमतें उत्पादन की कीमतों की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं तो नकारात्मक डिफ्लेटर सामने आ सकता है।

GDP डिफ्लेटर और महंगाई दर एक जैसी नहीं

जीडीपी डिफ्लेटर और महंगाई दर को एक ही मानना सही नहीं है। जीडीपी डिफ्लेटर अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है। वहीं खुदरा महंगाई घरेलू खपत में शामिल वस्तुओं और सेवाओं के एक निर्धारित समूह की कीमतों को मापती है। थोक महंगाई मुख्य रूप से वस्तुओं की थोक कीमतों में बदलाव पर आधारित होती है।

सरकार ने 2.6 प्रतिशत वृद्धि के दावे को खारिज किया

सरकार ने उस दावे को भी खारिज किया है जिसमें आर्थिक वृद्धि दर को केवल 2.6 प्रतिशत बताया गया था। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग की टिप्पणी के बाद स्पष्टीकरण दिया। पूर्व वित्त सचिव का दावा था कि अगर पिछले साल की जून तिमाही की जीडीपी को करीब 86 लाख करोड़ रुपये से घटाकर 80 लाख करोड़ रुपये नहीं किया जाता तो वृद्धि दर लगभग 2.6 प्रतिशत रहती।

नई जीडीपी श्रृंखला को बताया ज्यादा विश्वसनीय

15वें वित्त आयोग के चेयरमैन एन. के. सिंह ने नई जीडीपी श्रृंखला को ज्यादा विश्वसनीय बताया है। उनके अनुसार यह वैश्विक मानकों के अनुरूप है और इसमें उत्पादक मूल्य सूचकांक की नई श्रृंखला का इस्तेमाल किया गया है। जीडीपी अनुमान तैयार करने में 300 से अधिक अलग-अलग मूल्य डिफ्लेटर का इस्तेमाल किया जाता है। इससे अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों और उत्पादों की कीमतों में होने वाले बदलावों को ज्यादा बारीकी से शामिल किया जा सकता है और आंकड़ों की सटीकता बढ़ती है।

 

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