Top Newsउत्तर प्रदेशराज्य

रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में विद्या परिषद की बैठक: NEP-2020 पर जोर, कई नए पाठ्यक्रमों एवं कार्यक्रमों को मिली मंजूरी

बरेली, 29 अक्टूबर।महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में आज विद्या परिषद की बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार राय ने की। बैठक में एजेंडे के अनुसार विभिन्न शैक्षणिक, प्रशासनिक और विकासात्मक विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकांश प्रस्तावों को विद्या परिषद द्वारा पारित किया गया।

बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (एफ.वाई.यू.पी.) के चौथे वर्ष हेतु ऑनर्स एवं ऑनर्स विद रिसर्च पाठ्यक्रमों के निर्माण और अनुमोदन पर चर्चा हुई। इसके अंतर्गत संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी, संगीत (तबला, सितार एवं गायन), जंतु विज्ञान, गृह विज्ञान, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, वाणिज्य, रक्षा एवं सामरिक अध्ययन, वनस्पति विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी तथा सांख्यिकी जैसे विषयों के संशोधित पाठ्यक्रमों को जो बोर्ड आफ स्टडीज से पास हुए है को मंजूरी दी गई।

परिषद ने बी.एड./एम.एड. बोर्ड ऑफ स्टडीज की संस्तुति पर बी.एड. कार्यक्रम की मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव को स्वीकृति दी। अब विद्यार्थियों का मूल्यांकन 70 प्रतिशत बाह्य और 30 प्रतिशत आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर होगा। इसके अलावा एम.एससी. पादप विज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और एनीमल साइंस पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने, बी.टेक. इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग तथा बी.एससी. माइक्रोबायोलॉजी के संशोधित पाठ्यक्रमों को अनुमोदन दिया गया।

सी.एस.आई.टी. विभाग की संस्तुतियों के अनुसार बी.टेक. (एआई) के विस्तृत पाठ्यक्रम, बी.टेक. प्रथम वर्ष के संशोधित कोर्स स्ट्रक्चर तथा एम.टेक. (सीएसआईटी) के कोर्स स्ट्रक्चर को शैक्षिक सत्र 2027-28 से लागू करने पर सहमति बनी। वहीं, मास मीडिया एवं इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिज्म में स्नातक( बैचलर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन)और परास्नातक स्तर( मास्टर इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन) पर नए पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया और इसकी अनुमति दी गई।

बैठक में केंद्रीय पुस्तकालय के आधुनिकीकरण और विद्यार्थियों को बेहतर सेवाएं देने से जुड़ी कई अहम संस्तुतियों को मंजूरी दी गई। इनमें पुस्तकालय का पूर्ण स्वचालन, संस्थागत रिपोजिटरी की स्थापना, वात्सल्य डे-केयर सेंटर को 24×7 अध्ययन कक्ष के रूप में विकसित करना, ई-पुस्तकों और मुद्रित पुस्तकों की खरीद के लिए स्पष्ट नीति, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन (ONOS) सहित ऑनलाइन जर्नलों की सदस्यता, ओपन एक्सेस शोध-पत्रिकाओं की उपलब्धता, SWAYAM, MOOCs और NPTEL जैसे माध्यमों से ऑनलाइन अध्ययन संसाधनों का विस्तार, आधुनिक कंप्यूटर और हाई-स्पीड इंटरनेट जैसी सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण तथा पुस्तकालय भवन विस्तार और ओपन रैक प्रणाली जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

विद्या परिषद ने विश्वविद्यालय के संकायों की पुनर्संरचना, उप-संकायों के अंतर्गत स्थापित स्कूलों के निदेशकों की नियुक्ति और नियमावली निर्माण पर भी विचार किया। संघटक महाविद्यालयों के संचालन हेतु समिति द्वारा संस्तुत नियमावली को अनुमोदन के लिए रखा गया। इसके साथ ही कृषि संकाय के अंतर्गत बी.टेक. (कृषि अभियांत्रिकी), एम.बी.ए. इन एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट और एम.एससी. फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी शुरू करने तथा कृषि के स्नातक-परास्नातक पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शामिल करने की संस्तुतियों पर भी सहमति बनी।

बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप “उद्योग-विश्वविद्यालय सहयोग प्रकोष्ठ”, “भारतीय ज्ञान परंपरा अनुसंधान केंद्र” तथा “कौशल विकास, उद्यमिता उन्नयन एवं स्वावलंबन प्रकोष्ठ”* की स्थापना पर विचार और अनुमोदन किया गया। स्नातक स्तर पर भूगर्भ विज्ञान विषय को शामिल करने, बी.एससी. (बायोइन्फॉर्मेटिक्स) को स्ववित्तपोषित योजना के अंतर्गत शुरू करने तथा एम.बी.ए. (एग्री बिजनेस) और एम.एससी. (फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी) पाठ्यक्रमों पर भी चर्चा हुई।

परिषद ने एकेडमिक एक्सीलेंस एडवाइजरी कमेटी द्वारा संस्तुत नए रोजगारपरक पाठ्यक्रमों और अन्य संस्तुतियों पर विचार किया। इस क्रम में एविएशन सेक्टर के प्रतिष्ठित संस्थान फ्लाई ओला के पाठ्यक्रमों को शुरू करने संबंधी प्रस्ताव पर भी सहमति बनी।

वर्तमान में वार्षिक परीक्षा प्रणाली पर संचालित कई स्नातक और परास्नातक पाठ्यक्रमों को आगामी शैक्षिक सत्र 2027-28 से सेमेस्टर आधारित परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली में बदलने पर विचार किया गया।

बैठक में परीक्षा नियंत्रक कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 से आच्छादित कला स्नातक पाठ्यक्रम में विषय संयोजन के संबंध में प्राप्त सुझावों पर चर्चा हुई। परीक्षाओं को समयबद्ध और सुचारू बनाने के लिए विषयों को विभिन्न समूहों में बांटने और प्रत्येक समूह से केवल एक विषय चुनने की व्यवस्था पर विचार किया गया। साथ ही कुछ स्नातक (ऑनर्स) पाठ्यक्रमों को तीन वर्षीय से चार वर्षीय व्यवस्था में बदलने के लिए आवश्यक संशोधनों पर भी चर्चा हुई।

विद्या परिषद ने डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च का नाम बदलकर डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च एंड डेवलपमेंट*प्रेस विज्ञप्ति

अपर मुख्य सचिव श्रीमती वीना कुमारी करेंगी मिठास मेले का उद्घाटन, तीन लाख सिंगल बड बीजों का होगा वितरण

शाहजहांपुर, 28 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर में 30 अक्टूबर को आयोजित होने वाले मिठास मेले का उद्घाटन अपर मुख्य सचिव, गन्ना एवं चीनी उद्योग विभाग, उत्तर प्रदेश शासन, श्रीमती वीना कुमारी करेंगी। यह जानकारी परिषद के निदेशक श्री अभिषेक आनंद ने दी।

निदेशक श्री अभिषेक आनंद ने बताया कि मेले का प्रमुख आकर्षण उन्नत गन्ना किस्मों के सिंगल बड बीजों का वितरण होगा। इस अवसर पर नवीन गन्ना किस्म को.शा. 23232 के दो लाख तथा को.शा. 19231 के एक लाख सिंगल बड बीज, कुल तीन लाख सिंगल बड, किसानों को वितरित किए जाएंगे। इससे किसानों को उन्नत किस्मों की गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री उपलब्ध कराने तथा गन्ना उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी।

उन्होंने बताया कि मेले में गन्ना विभाग एवं चीनी मिलों द्वारा तकनीकी प्रदर्शनी और स्टॉल लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से किसानों को नवीन गन्ना किस्मों, वैज्ञानिक खेती की विधियों, कृषि यंत्रीकरण तथा विभागीय योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।

किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कृषक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। साथ ही, प्रदेश के विभिन्न परिक्षेत्रों से चयनित प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया जाएगा। महिला सशक्तीकरण एवं ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला स्वयं सहायता समूहों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

निदेशक ने कहा कि मिठास मेले का उद्देश्य गन्ना अनुसंधान की नवीनतम उपलब्धियों एवं आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना, उन्नत खेती को बढ़ावा देना तथा गन्ना किसानों की उत्पादकता और आय में वृद्धि के लिए उन्हें प्रेरित करना है। मेले में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से किसान, कृषि विशेषज्ञ, गन्ना विभाग के अधिकारी एवं चीनी मिलों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। करने के प्रस्ताव पर विचार किया।

इसके अलावा विश्वविद्यालय परिसर में “आनंदम् केंद्र” (सेंटर फॉर हैप्पीनेस, वेलबीइंग एंड होलिस्टिक डेवलपमेंट)* की स्थापना की जायेगी।

रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली सभी उपाधियों और अन्य शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों में ‘India’ के स्थान पर ‘Bharat’ अंकित किए जाने के संबंध में विचार एवं अनुमोदन किया गया। उत्तर प्रदेश में ऐसा करने वाला महात्मा ज्योति बा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय बरेली पहला विश्वविद्यालय है।

बैठक के अंत में कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार राय ने कहा कि
विद्या परिषद द्वारा पारित प्रस्तावों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर मिल सकें और वह अपने साथ-साथ विश्वविद्यालय का भी नाम रोशन कर सकें।

विद्या परिषद की बैठक में कुलसचिव महेंद्र कुमार, परीक्षा नियंत्रक अनिल कुमार यादव, डीन एकेडमिक प्रोफेसर एस के पाण्डेय ,सभी14 डीनस , एडेड एवं राजकीय कालेजों के प्राचार्य प्रोफेसर संजय गर्ग, प्रो आलोक श्रीवास्तव, प्रो संजय मिश्रा, प्रो त्रिलोचन शर्मा, प्रो अमित सिंह, प्रो विनय ऋषिवाल, प्रो यशपाल सिंह, प्रो एस एस बेदी, प्रो तुलिका सक्सेना, प्रो एस बी तिवारी उपकुलसचिव सुनीता यादव, प्रो ऋतु अग्रवाल, प्रो मनमीत कौर आदि उपस्थित रहे।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

--------------------------------------------------------------------------------------------------- https://www.youtube.com/watch?si=RtToJsBhYBatUrym&v=mOuYNSdhjHA&feature=youtu.be