रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में ‘बुक क्वेस्ट’ का आयोजन: इंजीनियरिंग शिक्षा में मजबूत अवधारणाओं के लिए पुस्तकें जरूरी, AI बने स्मार्ट सहयोगी

बरेली,08 सितम्बर। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजीमें आयोजित ओरिएंटेशन प्रोग्राम2026 के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग में इंजीनियरिंग विद्यार्थियों के लिए “Book Quest – Beyond the Pages”कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. छवि शर्मा द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य भावी इंजीनियरों में पुस्तक पढ़ने की आदत, मजबूत तकनीकी अवधारणाएं, तार्किक सोच, समस्या समाधान क्षमता, नवाचार और AI के जिम्मेदार उपयोग की समझ विकसित करना था। विद्यार्थियों को बताया गया कि तेजी से बदलते तकनीकी युग में केवल जानकारी प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है; एक सफल इंजीनियर के लिए उस जानकारी को समझना, विश्लेषण करना और वास्तविक समस्याओं के समाधान में प्रयोग करना अधिक महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष चर्चा की गई कि AI इंजीनियरिंग शिक्षा का शक्तिशाली सहयोगी है, लेकिन मजबूत मूलभूत ज्ञान का विकल्प नहीं। इंजीनियरिंग की पाठ्यपुस्तकें विद्यार्थियों को गणितीय सिद्धांतों, वैज्ञानिक अवधारणाओं, डिजाइन प्रक्रिया और तकनीकी विषयों की क्रमबद्ध एवं गहरी समझ प्रदान करती हैं। वहीं AI का उपयोग कठिन अवधारणाओं को समझने, वैकल्पिक समाधान खोजने, कोडिंग एवं सिमुलेशन में सहायता लेने और नए विचार विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
विद्यार्थियों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया कि यदि किसी इंजीनियरिंग छात्र को सर्किट, कम्युनिकेशन सिस्टम, प्रोग्रामिंग, स्ट्रक्चर या मशीन के मूल सिद्धांतों की जानकारी ही नहीं है, तो वह AI द्वारा दिए गए डिजाइन, गणना अथवा कोड में हुई गलती को पहचान नहीं पाएगा। इसलिए भावी इंजीनियरों के लिए संदेश दिया गया—“पहले Concept समझें, फिर AI से उसे Explore करें और अंत में परिणाम को स्वयं Verify करें।”
फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की संकायाध्यक्ष प्रो. अर्चना गुप्ता ने कहा कि आज के इंजीनियरिंग विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने के बजाय Problem Solver, Innovator और Lifelong Learner बनने की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को तकनीकी पुस्तकों और अच्छे साहित्य को पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि पुस्तकें गहन अध्ययन, धैर्य और स्वतंत्र चिंतन विकसित करती हैं, जबकि AI सीखने की गति और संभावनाओं को बढ़ा सकता है। “एक अच्छे इंजीनियर की पहचान केवल इस बात से नहीं होती कि वह तकनीक का उपयोग कर सकता है, बल्कि इससे होती है कि वह तकनीक के पीछे के सिद्धांत को समझकर उसका सही और जिम्मेदार उपयोग कर सके।”
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कार्यक्रम को रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनाने के लिए पुस्तकों, रचनात्मकता, ज्ञान, प्रस्तुतीकरण और त्वरित सोच पर आधारित विभिन्न प्रतिस्पर्धात्मक गतिविधियों** का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी रचनात्मकता, संचार कौशल, टीम भावना, पुस्तक ज्ञान और नवाचार क्षमता का प्रदर्शन किया।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कृष्णा शर्मा, राघव अग्रवाल, अनुभव, दिव्यांशु, पलक प्रजापति तथा अनुज वर्मा विजेता रहे।
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. छवि शर्मा ने कहा कि आने वाले समय में इंजीनियरिंग के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में AI की भूमिका बढ़ेगी, इसलिए विद्यार्थियों को AI से दूर रहने के बजाय उसका सही, नैतिक और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग सीखना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को “Read → Understand → Think → Question → Use AI → Verify → Innovate” की प्रक्रिया अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि “AI आपको उत्तर दे सकता है, लेकिन सही प्रश्न पूछने, उत्तर की सत्यता परखने और उससे नया समाधान विकसित करने की क्षमता आपके अपने ज्ञान से आती है।”
कार्यक्रम का प्रमुख संदेश रहा—
“Books Build the Engineer, AI Empowers the Engineer.”
“पुस्तकें इंजीनियर की ज्ञान-नींव बनाती हैं और AI उस ज्ञान को नवाचार में बदलने की शक्ति देता है।”
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

