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शतक लगाते ही जुरेल ने किया सलाम, ‘जय जवान जय किसान’ टैटू दिखाकर पिता-दादा को किया याद; भावुक कर देगा ये किस्सा

नई दिल्ली: श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद 115 रन की पारी खेली और टेस्ट करियर का दूसरा शतक पूरा किया। हालांकि उनकी इस पारी से ज्यादा चर्चा उस खास अंदाज की हो रही है, जिसमें उन्होंने शतक पूरा करने के बाद जश्न मनाया। जुरेल ने शतक पूरा करते ही सलाम किया और फिर अपने बाइसेप्स पर बना ‘जय जवान जय किसान’ टैटू दिखाया। उनका यह जश्न महज मैदान पर खुशी जाहिर करने का तरीका नहीं था, बल्कि परिवार की जड़ों को सम्मान देने का भावुक पल था।

पिता सेना में रहे, दादा किसान थे

जुरेल ने खुद बताया कि उनके इस खास टैटू और शतक के बाद किए गए सलाम के पीछे उनके पिता और दादा की कहानी है। उनके दादा किसान थे, जबकि पिता सेना में रहे हैं। जुरेल ने अपनी जिंदगी से जुड़ी इन दोनों महत्वपूर्ण पहचान को ‘जय जवान जय किसान’ के रूप में शरीर पर हमेशा के लिए दर्ज कराया है।

शतक पूरा करने के बाद किया गया सलाम भी उन्होंने अपने पिता और दादा को समर्पित किया। इस खुलासे के बाद जुरेल का शतक और उसका जश्न और भी खास हो गया।

99 रन पर बढ़ गया था दबाव, डाइव लगाकर पूरा किया शतक

जुरेल ने अपनी पारी के दौरान बेहद धैर्य और समझदारी के साथ बल्लेबाजी की। वह 99 रन तक सहज नजर आए, लेकिन शतक के करीब पहुंचते ही श्रीलंकाई गेंदबाजों ने दबाव बढ़ा दिया। 99 के स्कोर पर असीथा फर्नांडो ने अच्छी लेंथ पर गेंद डाली और श्रीलंका ने फील्डिंग भी कड़ी कर दी।

एक गेंद पर जुरेल ने सीधा शॉट खेला। उन्हें लगा कि गेंद फील्डर से पहले गैप में निकल जाएगी, लेकिन फील्डर को तेजी से गेंद की तरफ बढ़ता देख उन्हें अंदाजा हो गया कि एक रन पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगानी होगी। जुरेल ने तेजी से दौड़ लगाई और डाइव लगाकर अपना शतक पूरा किया।

पंत के साथ 112 रन की साझेदारी ने संभाली भारतीय पारी

इस शानदार पारी में जुरेल को ऋषभ पंत का भी बेहतरीन साथ मिला। दोनों बल्लेबाजों ने मिलकर 112 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी की। पंत ने अपने आक्रामक अंदाज में 63 रन बनाए, जबकि जुरेल ने परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी करते हुए भारतीय पारी को मजबूती दी।

जुरेल ने माना कि पंत जैसे अनुभवी खिलाड़ी के साथ बल्लेबाजी करने से उन्हें काफी कुछ सीखने को मिलता है। पारी के दौरान वह अलग-अलग परिस्थितियों को समझने और उसके मुताबिक बल्लेबाजी करने के लिए पंत से सलाह भी लेते रहे।

पंत की नकल नहीं, अपने अंदाज में खेलते हैं जुरेल

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जुरेल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऋषभ पंत की तरह बल्लेबाजी करने की कोशिश नहीं करते। उनका मानना है कि हर खिलाड़ी की अपनी स्वाभाविक शैली होती है और टेस्ट क्रिकेट की खूबसूरती भी इसी में है कि बल्लेबाज अपनी शैली के मुताबिक खेलता है।

जुरेल ने अपनी बल्लेबाजी में इस बात पर जोर दिया कि किस गेंदबाज के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाना है और किसके स्पेल को संभलकर खेलना है। इसी रणनीति के साथ उन्होंने श्रीलंकाई गेंदबाजों का सामना किया और बड़ी पारी खेलने में कामयाब रहे।

पंत के चोटिल होने पर जुरेल ने संभाली विकेटकीपिंग

दिन का खेल खत्म होने से पहले ऋषभ पंत के दाएं कंधे में परेशानी हुई, जिसके बाद जुरेल ने विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी संभाली। जुरेल ने बताया कि टीम पंत की फिटनेस पर नजर रख रही है और उम्मीद है कि वह जल्द पूरी तरह फिट हो जाएंगे।

वहीं मोहम्मद सिराज ने भी जुरेल को शतक तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। सिराज ने 29 गेंदों तक जुरेल का साथ दिया, जिससे जुरेल को अपना शतक पूरा करने का मौका मिला।

भारत ने 503 रन पर घोषित की पारी, श्रीलंका के 8 रन पर दो विकेट

भारतीय टीम ने दूसरे दिन 503 रन पर 9 विकेट के स्कोर पर अपनी पहली पारी घोषित की। इसके बाद श्रीलंका की पारी लड़खड़ा गई और दिन का खेल खत्म होने तक मेजबान टीम ने महज 8 रन पर दो विकेट गंवा दिए।

हालांकि इस दिन की सबसे यादगार तस्वीर ध्रुव जुरेल का शतक और उसके बाद किया गया सलाम रहा। यह जश्न एक क्रिकेटर की उपलब्धि से आगे बढ़कर अपने पिता और दादा के प्रति सम्मान और परिवार की जड़ों से जुड़े गर्व की कहानी बन गया।

 

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