संजय राउत देश के सबसे साहसी सांसद-फेम इंडिया

मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। देश में सामाजिक मुद्दों, व्यक्तियों, समस्याओं का निष्पक्ष सर्वे कर उसको राष्ट्रीय फलक पर उभारने वाली राष्ट्रीय पत्रिका “फेम इंडिया ने शिवसेना संसदीय दल के नेता, शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता, राज्यसभा सांसद संजय राउत को देश का सबसे साहसी सांसद के रूप में चयन किया है। प्रस्तुत है फेम इंडिया के मुख्य अंश-

मुखर वक्ता, संसदीय हस्तक्षेप और राजनीतिक संवाद की प्रभावशाली आवाज
“संजय राउत”
भारतीय राजनीति में कुछ नेता ऐसे होते हैं जिनकी पहचान केवल चुनावी राजनीति से नहीं, बल्कि विचारों की स्पष्टता, संवाद कौशल और संसदीय सक्रियता से बनती है। महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद संजय राउत इसी श्रेणी के नेताओं में शामिल हैं। पत्रकार, लेखक, संपादक और राजनेता के रूप में उन्होंने सार्वजनिक जीवन के विभिन्न आयामों में अपनी अलग पहचान बनाई है। शिवसेना और बाद में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख रणनीतिकार एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में वे लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहे हैं। संसद के भीतर उनकी सक्रिय भागीदारी और संसद के बाहर समसामयिक मुद्दों पर स्पष्ट राय रखने की शैली ने उन्हें देश के चर्चित सांसदों में शामिल किया है।
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के अलीबाग में 15 नवंबर 1961 को संजय राउत ने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातक शिक्षा प्राप्त की। सार्वजनिक जीवन की शुरुआत उन्होंने पत्रकारिता से की और शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ से जुड़े। समय के साथ वे इसके कार्यकारी संपादक बने और राजनीतिक लेखन तथा संपादकीय दृष्टिकोण के कारण व्यापक पहचान हासिल की। उन्होंने कई पुस्तकों कालेखन भी किया तथा ‘ठाकरे’ फिल्म की पटकथा लेखन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निजी जीवन में उनकी पत्नी वर्षा राउत हैं और उनके दो बच्चे हैं।
संजय राउत वर्ष 2004 में पहली बार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद वे लगातार चार बार उच्च सदन के सदस्य बने और दो दशकों से अधिक समय से महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वर्ष 2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद वे राज्यसभा में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) संसदीय दल के नेता बने। संगठन और संसद-दोनों स्तरों पर उनकी भूमिका पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में रही है।
“संसदीय सक्रियता की दृष्टि से संजय राउत का रिकॉर्ड उल्लेखनीय है। पीआरएस इंडिया के अनुसार उन्होंने अब तक 1,900 से अधिक प्रश्न पूछे हैं, जो राज्यसभा के सक्रिय सांसदों में उनकी पहचान को मजबूत करता है। उन्होंने 159 बहसों में भाग लिया है और अनेक राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। यद्यपि उनकी उपस्थिति लगभग 68 प्रतिशत रही है, लेकिन प्रश्न पूछने के मामले में वे लगातार सक्रिय रहे हैं और विभिन्न मंत्रालयों से विस्तृत जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करते रहे हैं।

संसद में उनके प्रश्नों का दायरा अत्यंत व्यापक रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, रेल, नागरिक उडूयन, सड़क परिवहन, ऊर्जा, पर्यावरण, शहरी विकास, श्रम, पर्यटन, दूरसंचार और औद्योगिक विकास जैसे अनेक विषयों पर उन्होंने सरकार से प्रश्न पूछे। हाल के वर्षों में महाराष्ट्र के औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक पार्क, किसानों की सहायता, स्वास्थ्य सेवाओं, रेलवे सुरक्षा, शहरी बाढ़, महिला सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और डिजिटल संचार जैसे विषयों पर उनके प्रश्न विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे हैं।
महाराष्ट्र से जुड़े मुद्दों को उन्होंने संसद में निरंतर प्राथमिकता दी। किसानों की समस्याएँ, gene मराठवाड़ा और विदर्भ में जल संकट, मुंबई महानगर की आधारभूत संरचना, रेलवे परियोजनाएँ, शहरी परिवहन, औद्योगिक निवेश तथा राज्य के आर्थिक विकास से जुड़े विषयों पर वे लगातार अपनी बात रखते रहे हैं। उनका प्रयास रहा कि महाराष्ट्र के विकास से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय नीति निर्माण के केंद्र में स्थान मिले।
संजय राउत की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सक्रिय संवाद बनाए रखते हैं। सदन में वे नियमों के अंतर्गत विभिन्न मुद्दे उठाते हैं, जबकि संसद के बाहर नियमित प्रेस वार्ताओं और सार्वजनिक संवाद के माध्यम से समसामयिक राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी पार्टी का पक्ष रखते हैं। उनकी स्पष्टवादिता और त्वरित प्रतिक्रिया देने की शैली ने उन्हें राष्ट्रीय मीडिया में एक प्रमुख राजनीतिक आवाज बनाया
विधायी बहसों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है। उन्होंने संविधान, संघीय ढाँचे, लोकतांत्रिक संस्थाओं, आंतरिक सुरक्षा, आर्थिक नीति, विदेश नीति और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। हाल के वर्षों में उन्होंने संसद में स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी, संविधान के 75 वर्ष, गृह मंत्रालय के कामकाज, तथा परिसीमन (Delimitation) जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा में भाग लिया।
संसदीय समितियों में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है। वे विभिन्न अवधियों में गृह मामलों की संसदीय समिति, विदेश मामलों की परामर्शदात्री समिति, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले समिति तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति सहित अनेक समितियों के सदस्य रहे हैं। इन समितियों के माध्यम से उन्होंने नीतिगत विषयों की गहन समीक्षा और सुझाव देने में योगदान दिया।
सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLADS) के अंतर्गत भी उन्होंने महाराष्ट्र में जनोपयोगी कार्यों को प्राथमिकता दी। सांसद निधि के माध्यम से विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन, पेयजल योजनाएँ, सामुदायिक भवन, सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य आधारभूत विकास कार्यों की अनुशंसा की गई। कोविड-19 के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने तथा स्थानीय संस्थाओं को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के प्रयासों में भी उनकी भूमिका रही।
संसद के बाहर भी संजय राउत साहित्य और पत्रकारिता से अपना जुड़ाव बनाए हुए हैं। लेखन, संपादकीय टिप्पणियों और सार्वजनिक व्याख्यानों के माध्यम से वे सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर अपने विचार साझा करते रहते हैं। समर्थकों का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत जटिल राजनीतिक विषयों को सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता है”।
