कावेरी विवाद पर फिर गरमाई सियासत, विजय सरकार के मंत्री ने डीके शिवकुमार पर साधा तीखा निशाना
नई दिल्ली: कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों राज्यों के बीच प्रस्तावित वार्ता स्थगित होने के बाद तमिलनाडु सरकार के वरिष्ठ मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि डीके शिवकुमार कांग्रेस नेतृत्व की तुलना में डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन के प्रभाव में अधिक काम करते हैं।
मीडिया से बातचीत के दौरान आर. निर्मल कुमार ने कहा कि डीके शिवकुमार पार्टी नेतृत्व की सलाह से अधिक स्टालिन और उनके परिवार की बातों को महत्व देते हैं। उनके इस बयान के बाद कावेरी जल विवाद को लेकर दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

वार्ता टलने के बाद बढ़ी बयानबाजी
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब हाल ही में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने कावेरी मुद्दे पर कर्नाटक नेतृत्व के साथ सीधे संवाद की पहल की थी। हालांकि बाद में प्रस्तावित बैठक स्थगित हो गई। इसके बाद तमिलनाडु सरकार के मंत्री का यह बयान सामने आया, जिसे राजनीतिक विश्लेषक वार्ता की दिशा से हटकर अधिक आक्रामक रुख के तौर पर देख रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि अब कावेरी विवाद के समाधान के लिए न्यायालय और संबंधित न्यायाधिकरणों की प्रक्रिया पर अधिक जोर दिया जा सकता है।
डीएमके और एआईएडीएमके पर भी उठाए सवाल
आर. निर्मल कुमार ने तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टियों डीएमके और एआईएडीएमके को भी निशाने पर लिया। उन्होंने सवाल किया कि डीएमके ने अपने शासनकाल के दौरान कावेरी विवाद को लेकर प्रभावी कानूनी पहल क्यों नहीं की।
उन्होंने एआईएडीएमके पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पार्टी विधानसभा में पारित प्रस्तावों का समर्थन करती है, तो बाद में अदालत में अलग रुख अपनाने का क्या औचित्य है।

कर्नाटक पर वार्ता में सहयोग नहीं करने का आरोप
तमिलनाडु सरकार के मंत्री ने आरोप लगाया कि कर्नाटक की ओर से ऐसा माहौल बनाया गया, जिसके कारण दोनों राज्यों के बीच प्रस्तावित बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि इन आरोपों पर कर्नाटक सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
कावेरी और मेकेदातू परियोजना को लेकर क्यों जारी है विवाद?
कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच वर्षों से विवाद बना हुआ है। दोनों राज्यों के हिस्से का पानी न्यायाधिकरण और न्यायालय के आदेशों के आधार पर तय किया गया है, लेकिन कम वर्षा और जलाशयों में घटते जलस्तर के कारण हर साल मानसून के दौरान यह विवाद फिर गहरा जाता है।
विवाद का एक बड़ा कारण कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातू बांध परियोजना भी है। कर्नाटक का कहना है कि इस परियोजना से बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
वहीं तमिलनाडु का तर्क है कि मेकेदातू बांध बनने से कावेरी के निचले हिस्से में पानी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है, जिससे डेल्टा क्षेत्र की सिंचाई और किसानों की आजीविका पर असर पड़ सकता है। इसी कारण राज्य लंबे समय से इस परियोजना का विरोध करता आ रहा है। फिलहाल कावेरी जल विवाद और मेकेदातू परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के बीच कानूनी और राजनीतिक संघर्ष जारी है।
