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स्ट्रोक के बाद कमजोरी और बिगड़ा संतुलन सुधारने में मददगार है फिजियोथेरेपी, डॉक्टर से समझें क्यों जरूरी

नई दिल्ली: हर साल 8 सितंबर को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को फिजियोथेरेपी के महत्व और इससे जुड़े स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूक करना है। आमतौर पर फिजियोथेरेपी को कमर, घुटने, कंधे या हड्डियों से जुड़ी समस्याओं के इलाज तक सीमित माना जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक इसका दायरा इससे कहीं व्यापक है। सही समय पर विशेषज्ञ की सलाह से कराई गई फिजियोथेरेपी हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के साथ स्ट्रोक के बाद मरीज के पुनर्वास में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

स्ट्रोक के बाद मरीज को कई तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कई लोगों के हाथ-पैरों में कमजोरी आ जाती है, जबकि कुछ मरीजों को चलने-फिरने में दिक्कत होने लगती है। शरीर का संतुलन बिगड़ना और रोजमर्रा के सामान्य काम करने में परेशानी भी स्ट्रोक के बाद सामने आने वाली समस्याओं में शामिल हैं। ऐसे में मरीज की स्थिति के अनुसार शुरू किया गया फिजियोथेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम उसकी गतिविधियों और संतुलन को बेहतर करने में मदद कर सकता है।

स्ट्रोक के बाद घर पर भी जारी रखें सुरक्षित गतिविधियां

विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रोक के बाद पुनर्वास को केवल अस्पताल तक सीमित नहीं रखना चाहिए। मरीज के उपचार और उसकी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए घर पर भी सुरक्षित तरीके से व्यायाम और जरूरी गतिविधियां जारी रखना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, किसी भी तरह का व्यायाम डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के बिना शुरू नहीं करना चाहिए। हर स्ट्रोक मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए उसके पुनर्वास का तरीका भी उसकी व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार तय किया जाना जरूरी है।

सिर्फ दर्द कम करना नहीं, शरीर की कार्यक्षमता सुधारना भी मकसद

फिजियोथेरेपी का उद्देश्य केवल दर्द कम करना नहीं, बल्कि शरीर की कार्यक्षमता और गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद करना भी है। स्ट्रोक के बाद शरीर के प्रभावित हिस्सों को दोबारा सक्रिय करने के लिए नियमित और सही अभ्यास महत्वपूर्ण हो सकता है। व्यायाम और पुनर्वास के जरिए मरीज को शरीर की गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण हासिल करने और संतुलन सुधारने में मदद मिल सकती है। इससे धीरे-धीरे रोजमर्रा के काम करने की क्षमता भी बेहतर हो सकती है।

तकनीक के इस्तेमाल से बदल रहा फिजियोथेरेपी का तरीका

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आज फिजियोथेरेपी का क्षेत्र तेजी से तकनीक आधारित भी हो रहा है। मोशन एनालिसिस, सेंसर आधारित निगरानी, पहनने योग्य उपकरण, डिजिटल व्यायाम कार्यक्रम और रोबोटिक पुनर्वास जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन आधुनिक तरीकों से मरीज की गतिविधियों को बेहतर तरीके से समझने और उसकी प्रगति पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।

घंटों बैठना और स्क्रीन टाइम भी बन रहा बड़ी चुनौती

विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के मौके पर विशेषज्ञ कम शारीरिक गतिविधि वाली जीवनशैली को भी बड़ी समस्या मानते हैं। आज के समय में लंबे समय तक कार्यालय में बैठे रहना, बढ़ता स्क्रीन टाइम और व्यायाम की कमी शरीर को धीरे-धीरे कमजोर कर सकती है। शारीरिक गतिविधि कम होने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बीमारी या दर्द होने के बाद ही नहीं, बल्कि स्वस्थ रहने के लिए भी हर उम्र के लोगों को अपनी दिनचर्या में नियमित शारीरिक गतिविधि शामिल करनी चाहिए।

फिजियोथेरेपी को केवल हड्डियों और जोड़ों के दर्द से जुड़ा उपचार मानना सही नहीं है। स्ट्रोक के बाद सही पुनर्वास मरीज की गतिविधियों और संतुलन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञ की निगरानी में नियमित व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाना शरीर की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

 

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