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69 साल की उम्र में संतोष महेंद्र ने जाते-जाते दिया अनमोल तोहफा, दो जरूरतमंदों की जिंदगी रोशन करेंगी उनकी आंखें

सीतापुर: सक्षम संस्था लंबे समय से लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक कर रही है। वर्ष 2008 से शुरू इस अभियान के तहत संस्था अब तक 284 नेत्रदान आंख अस्पताल सीतापुर के माध्यम से करवा चुकी है। इन नेत्रदानों के जरिए जरूरतमंद नेत्रहीन लोगों को दुनिया की रंग-बिरंगी खूबसूरती देखने का अवसर मिला है। संस्था के इस अभियान को सीतापुर के लोगों का लगातार सहयोग मिल रहा है और लोग नेत्रदान के जरिए महर्षि दधीच की इस तपोस्थली में मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं।

निधन के बाद परिजनों ने लिया नेत्रदान का फैसला

नई बस्ती निवासी 69 वर्षीय संतोष महेंद्र, पुत्र कैलाश नारायण महेंद्र का कल शाम निधन हो गया। उनके निधन के बाद परिजनों ने सक्षम संस्था को सूचना देकर उनकी आंखों का दान कराने की इच्छा जताई। सूचना मिलते ही संस्था की टीम सक्रिय हो गई और नेत्रदान की प्रक्रिया शुरू कराई गई।

संस्था के मुकेश अग्रवाल ने अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकों की टीम का गठन कराया। इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने नेत्रदानी के निवास स्थान पर पहुंचकर उनकी दोनों आंखों को सुरक्षित किया। संस्था के अनुसार, इन दोनों आंखों को दो जरूरतमंद लोगों को निशुल्क प्रत्यारोपित किया जाएगा।

डॉक्टरों की टीम ने सुरक्षित की दोनों आंखें

नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करने वाली चिकित्सकीय टीम में डॉ. अरुणेश मिश्रा, डॉ. रितु शर्मा, डॉ. आयुषी, डॉ. पल्लवी, हर्षिता और शिफा शामिल रहीं। संस्था की टीम ने बताया कि सूचना मिलने के बाद दिन हो या रात, नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए सदस्य लगातार सक्रिय रहते हैं।

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2008 से नेत्रदान के लिए चला रही जागरूकता अभियान

सक्षम संस्था की स्थापना समाजसेवी महेश अग्रवाल और सुभाष अग्निहोत्री ने की थी। वर्तमान में संदीप भरतीया, मुकेश अग्रवाल, विकास अग्रवाल और अक्षत अग्रवाल संस्था के कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। संस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों को नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूक करना और जरूरतमंद लोगों तक नेत्रदान का लाभ पहुंचाना है।

दुनिया में बड़ी संख्या में लोग नेत्रदान की कमी के कारण जीवनभर दृष्टिहीनता का सामना करते हैं। ऐसे में मृत्यु के बाद किया गया नेत्रदान किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन में रोशनी लौटाने का माध्यम बन सकता है।

‘नेत्रदान से बढ़कर कोई अनमोल उपहार नहीं’

संस्था के अध्यक्ष संदीप भरतीया ने कहा कि नेत्रदान ऐसा अनमोल उपहार है, जो व्यक्ति के दुनिया से चले जाने के बाद भी किसी दूसरे के जीवन को प्रकाशमय कर सकता है। उन्होंने कहा कि किसी जरूरतमंद को दृष्टि का उपहार देना मानव जीवन को सच्चे अर्थों में सार्थक बनाने का कार्य है।

 

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