लखनऊ मेट्रो स्टेशन में दिखा प्रकृति का अनोखा रूप, पेड़ों की छाल में नजर आए भगवान गणेश के 20 स्वरूप

लखनऊ: गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से हजरतगंज मेट्रो स्टेशन पर प्रतिभाशाली छायाचित्रकार पुनीत कात्यायन की एकल छायाचित्र प्रदर्शनी ‘द नेचुरल फॉर्म्स ऑफ गणेशा’ का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने किया। प्रदर्शनी के क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना हैं।

पेड़ों की छाल में दिखे गजानन के 20 प्राकृतिक स्वरूप
प्रदर्शनी में वृक्षों की छाल, तनों और उनकी प्राकृतिक बनावट में स्वतः उभरते भगवान गणेश के 20 अलग-अलग स्वरूपों को छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। इन तस्वीरों की खासियत यह है कि इन्हें पुनीत कात्यायन ने महज 2 से 3 इंच के बेहद छोटे प्राकृतिक फ्रेम में खोजकर कैमरे में कैद किया। बाद में इन्हीं सूक्ष्म छवियों को प्रदर्शनी के लिए बड़े आकार में प्रस्तुत किया गया।
सूक्ष्म दृष्टि और धैर्य का अनूठा उदाहरण
प्राकृतिक बनावटों में गणेश के स्वरूप तलाशने की प्रक्रिया में छायाचित्रकार की सूक्ष्म दृष्टि, धैर्यपूर्ण अवलोकन और तकनीकी दक्षता साफ नजर आती है। तस्वीरों में किसी तरह का कृत्रिम हस्तक्षेप नहीं किया गया है। प्रकाश, रंग और बनावट को प्राकृतिक रूप में ही कैमरे में कैद किया गया है।
15 वर्षों से प्रकृति और अध्यात्म पर काम कर रहे पुनीत कात्यायन
पुनीत कात्यायन पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से प्रकृति, अध्यात्म और दृश्य-कथा पर काम कर रहे हैं। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ आर्ट्स से कला-शिक्षा प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने लंबे समय तक विज्ञापन जगत में कला निर्देशक के रूप में कार्य किया। वर्तमान में वह एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ में सहायक प्रोफेसर हैं।
‘ट्री बार्क सीरीज’ से आगे बढ़ी कलात्मक यात्रा
पुनीत कात्यायन की चर्चित ‘ट्री बार्क सीरीज’ में वृक्षों की छाल के भीतर छिपी प्राकृतिक आकृतियों और विभिन्न रूपों की खोज की गई है। ‘गजानन’ श्रृंखला इसी कलात्मक यात्रा का आध्यात्मिक विस्तार है। इसमें घायल, कटे और समय की मार झेल चुके वृक्षों की बनावट में भी सृजन, आस्था और जीवन की उपस्थिति को तलाशा गया है।

-------------------------------------------------------------------------------------------
प्रकृति को ही बनाया गया कलाकार
प्रदर्शनी की तस्वीरों में कृत्रिम रूप से प्रकाश, रंग या बनावट को बदलने का प्रयास नहीं किया गया है। प्रकृति की अपनी आकृतियों और बनावटों को ही भगवान गणेश के स्वरूप के रूप में कैमरे में दर्ज किया गया है। यही इस प्रदर्शनी को सामान्य छायाचित्र प्रदर्शनी से अलग बनाता है।
क्यूरेटर ने बताया प्रकृति, आस्था और पर्यावरण चेतना का संवाद
प्रदर्शनी के क्यूरेटर भूपेंद्र अस्थाना ने कहा कि लेखन के बाद फोटोग्राफी संप्रेषण की सबसे प्रभावशाली दृश्य भाषा है। प्रकृति की अनगिनत बनावटें हमारी कल्पना, संवेदना और सौंदर्यबोध का विस्तार करती हैं। उन्होंने कहा कि पुनीत कात्यायन की प्रदर्शनी यह दिखाती है कि संवेदनशील दृष्टि साधारण वृक्ष की छाल में भी दिव्यता, नवाचार और आध्यात्मिक अनुभूति तलाश सकती है।
उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल छायाचित्रों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान, पर्यावरण चेतना और भारतीय सांस्कृतिक स्मृति के बीच एक कलात्मक संवाद भी है।
कला प्रेमियों और विद्यार्थियों ने लिया प्रदर्शनी का अनुभव
प्रदर्शनी में पंचानन मिश्रा, अविनाश लिटिल, अंगद वर्मा, दिनेश आर्या और आनंद कुमार सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी, कलाकार, छायाकार, विद्यार्थी और आम नागरिक पहुंचे। लोगों ने प्रकृति, आस्था और कला के इस अनूठे संगम को करीब से देखा और तस्वीरों के माध्यम से प्राकृतिक रूपों में दिखाई दे रहे गणेश स्वरूपों का अनुभव किया।
17 सितंबर तक देख सकेंगे आम लोग
‘द नेचुरल फॉर्म्स ऑफ गणेशा’ प्रदर्शनी आम लोगों के अवलोकन के लिए 17 सितंबर तक लगी रहेगी। प्रदर्शनी के माध्यम से प्रकृति की सूक्ष्म बनावटों में छिपे गणेश के स्वरूपों को देखने और भारतीय आध्यात्मिक चेतना से जुड़े इस अनूठे कलात्मक प्रयोग को समझने का अवसर मिलेगा।

