रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया : कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने कहा—युवा शक्ति को दिशा देकर ही साकार होगा विकसित भारत @2047 का संकल्प

बरेली,15 अगस्त। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली में 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने ध्वजारोहण कर राष्ट्रध्वज को नमन किया तथा विश्वविद्यालय परिवार को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।कल्चरल क्लब की छात्राओं सत्यसाक्षी, मनीषा और तनु ने सामूहिक राष्ट्रगान में प्रस्तुति दी। राष्ट्र गौरव , समृद्धि, साहस, शांति, प्रगति, विकास और युवा आकांक्षाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के प्रतीक के रूप में तिरंगे रंग के गुब्बारे उड़ाए गए तथा राष्ट्र और विश्वविद्यालय प्रगति की कामना की गई। अपने संबोधन में कुलपति प्रो . के.पी.सिंह ने कहा कि आजादी हमें सहज रूप से प्राप्त नहीं हुई। महात्मा गांधी, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, रानी लक्ष्मीबाई और असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उन्होंने व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र की स्वतंत्रता और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए बलिदान दिया। उन्हीं के त्याग का परिणाम है कि आज हम स्वतंत्रता की हवा में सांस ले रहे हैं। प्रो. सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल अतीत के गौरव को स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य के भारत की दिशा निर्धारित करने का भी अवसर है। आज हमें विशेष रूप से अपनी युवा पीढ़ी पर ध्यान देना होगा। वर्तमान पीढ़ी ज्ञान, सूचना, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में अत्यंत तेजी से आगे बढ़ रही है। यह पीढ़ी डिजिटल रूप से सक्षम, वैश्विक घटनाक्रम से परिचित, अधिक मुखर और नए विचारों को ग्रहण करने वाली है। इसलिए अभिभावकों, शिक्षकों और सभी स्टेकहोल्डर्स को भी अपनी कार्यप्रणाली और संवाद के तरीकों में परिवर्तन करना होगा।
उन्होंने कहा कि हमें यह समझना होगा कि आज का युवा क्या जानता है, क्या कर सकता है और उसके सपने क्या हैं। हमें युवाओं को दबाने के बजाय उनकी जिज्ञासा, रचनात्मकता और प्रतिभा को सही दिशा देनी होगी। उन्हें शिक्षा, कौशल, रोजगार, उद्यमिता, अनुसंधान और वैश्विक अवसरों से जोड़ना होगा। साथ ही करियर निर्देशन और मार्गदर्शन के माध्यम से उनके सपनों को लक्ष्य में और लक्ष्य को उपलब्धि में बदलने का वातावरण तैयार करना होगा। युवा शक्ति को विकसित किए बिना विकसित भारत @2047 की संकल्पना पूरी नहीं हो सकती। आज की युवा पीढ़ी आने वाले दो दशकों में भारत के सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी स्वरूप को निर्धारित करेगी। इसलिए हमें उनकी क्षमता को पहचानकर उन्हें वैश्विक स्तर की शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराने होंगे। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि नई पीढ़ियों के साथ हमें कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। नई पीढ़ी बचपन से ही डिजिटल तकनीक, इंटरनेट और AI जैसे उपकरणों के वातावरण में विकसित हो रही है। इसलिए शिक्षकों और अभिभावकों को भी डिजिटल एवं AI साक्षरता बढ़ाते हुए इस पीढ़ी को समझने का प्रयास करना होगा।
हमें अपनी कार्य प्रणाली और तौर-तरीकों को बदलना होगा। युवा हमसे केवल निर्देश नहीं, बल्कि संवाद, सहयोग और अवसर चाहते हैं। हमें उन्हें ऐसा वातावरण देना होगा जिसमें वे प्रश्न पूछ सकें, प्रयोग कर सकें, असफलताओं से सीख सकें और नए समाधान विकसित कर सकें।”
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय इसी सोच के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय के शोध निदेशालय, सभी केंद्र और सेल एवं आर आई एफ, संबद्ध और संगठक कॉलेज , सांस्कृतिक केन्द्र लगातार मजबूत हो रहे है । शोध एवं प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है और विभिन्न निदेशालय धीरे-धीरे निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। विश्वविद्यालय के विकास का एक महत्वपूर्ण संकेत विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या भी है। विश्वविद्यालय परिसर में जहां पूर्व में लगभग 1,700 विद्यार्थी अध्ययनरत थे, वहीं आज यह संख्या 6000 से अधिक हो चुकी है।
प्रो. सिंह ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय को उसी गति से इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी, प्रयोगशालाएं, नवाचार, शोध सुविधा, अकादमिक प्रगति में आगे बढ़ाया जाता रहा, तो वह राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य विश्वविद्यालय को वैश्विक शैक्षणिक मानकों के अनुरूप विकसित करना है और इसके लिए सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों को अब वैश्विक अकादमिक समुदाय से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रॉजेक्ट्स के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यापक अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।कुलपति ने कहाण कि आज 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हमारा सबसे बड़ा संकल्प यही होना चाहिए कि हम अपनी युवा शक्ति को पहचानें, उसे दिशा दें, उसके सपनों को समझें और उसे अवसर प्रदान करें। प्रत्येक युवा विकसित भारत की टीम का एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी है। हमें लक्ष्य निर्धारित करना होगा, निरंतर प्रयास करना होगा और अपनी युवा शक्ति को आगे बढ़ाना होगा। यही हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के भारत के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय को शिक्षा, शोध, नवाचार, AI, उद्यमिता, तकनीक और वैश्विक अकादमिक सहभागिता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
“युवा आगे बढ़ेगा, विश्वविद्यालय आगे बढ़ेगा और विश्वविद्यालय के साथ भारत आगे बढ़ेगा—इसी युवा शक्ति के बल पर हम विकसित भारत @2047 के संकल्प को साकार करेंगे।” मंच संचालन सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ज्योति पाण्डेय ने किया।
कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो . एस.के पाण्डेय, परीक्षा नियंत्रक डॉ.अनिल यादव, प्रो. आलोक श्रीवास्तव, डॉ. ज्योति पाण्डेय, ममता सिंह, एल.आर.भंडारी, श्री विनय वर्मा, तपन वर्मा, सुधांशु शर्मा सहित संकायाध्यक्ष,
विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट


