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तेल आपूर्ति को लेकर केंद्र पर राहुल गांधी का हमला, बोले— दुनिया संकट में है और प्रधानमंत्री चुप

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक हालात को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और आगे गंभीर संकट के संकेत दिखाई दे रहे हैं। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे समय में देश को मजबूत और स्पष्ट नेतृत्व की जरूरत है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने लिखा कि भारत के कुल तेल आयात का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है, ऐसे में वहां किसी भी तरह का तनाव देश की आपूर्ति पर असर डाल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि एलपीजी और एलएनजी की स्थिति इससे भी ज्यादा गंभीर हो सकती है।

प्रधानमंत्री की चुप्पी पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने अपने पोस्ट में कहा कि संघर्ष अब भारत के पड़ोस तक पहुंच गया है और हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत के डूबने की खबर सामने आई है। इसके बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। राहुल गांधी ने कहा कि ऐसे कठिन समय में देश को स्थिर और निर्णायक नेतृत्व की आवश्यकता होती है, लेकिन मौजूदा हालात में सरकार की रणनीतिक स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बढ़े कच्चे तेल के दाम

इधर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। गुरुवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सप्लाई पर असर की आशंका के चलते यह तेजी देखने को मिली है।

रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसी बीच इस मार्ग से गुजर रहे एक कंटेनर जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला होने की खबर भी सामने आई है, जिसमें जहाज को नुकसान पहुंचा।

भारत के पास फिलहाल पर्याप्त तेल भंडार

हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल भारत की स्थिति सुरक्षित है। देश के पास करीब 25 दिनों का कच्चे तेल का भंडार और लगभग 25 दिनों के पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक उपलब्ध है।

भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। इसमें करीब 50 प्रतिशत तेल मिडिल ईस्ट के देशों से आता है, जो मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत तक पहुंचता है। ऐसे में ईरान से जुड़े तनाव और इस मार्ग पर पैदा हुई स्थिति का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

 

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