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बाल विवाह और नशे के खिलाफ रायबरेली में बड़ा अभियान, अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश

रायबरेली: बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत रायबरेली में 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर स्थित किरण हाल में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती अनीशा ने की। इस दौरान बाल संरक्षण, नशा मुक्ति, बाल भिक्षावृत्ति रोकथाम और बाल अधिकारों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी थानों पर नियुक्त बाल कल्याण अधिकारी ड्रग्स निरीक्षक के साथ समन्वय स्थापित कर मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच करें। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी मेडिकल स्टोर पर नशीली दवाओं की बिक्री या भंडारण न हो।

बाल भिक्षावृत्ति और नशा मुक्ति पर विशेष जोर

बैठक में बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति और नशा मुक्ति अभियान को लेकर व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। अधिकारियों से कहा गया कि भीख मांगने में लिप्त गरीब, अशिक्षित बच्चों, महिलाओं और दिव्यांग व्यक्तियों का सर्वेक्षण कर उनका डेटा बैंक तैयार किया जाए। साथ ही उनके पुनर्वास, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कानूनी सहायता के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से जागरूकता अभियान चलाने और स्कूलों, कॉलेजों व सार्वजनिक स्थलों पर लोगों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए।

निराश्रित बच्चों के चिन्हांकन और दाखिले पर निर्देश

बैठक में जनपद में निराश्रित और बाल भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों का चिन्हांकन कर ‘साथी योजना’ के तहत नजदीकी विद्यालयों में उनका दाखिला सुनिश्चित कराने पर भी जोर दिया गया।

इसके अलावा इस्कॉन द्वारा संचालित गुरुकुलों, आश्रमों, मंदिरों और स्कूलों में बच्चों के साथ यौन, शारीरिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार से जुड़े मामलों में तत्काल जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि प्रभावित बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सुरक्षात्मक और सुधारात्मक उपाय लागू किए जाएं।

नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में सख्ती

बैठक में किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 77 और 78 के तहत बच्चों को नशीले पदार्थों के सेवन या सेवन कराने के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

साथ ही यह भी कहा गया कि यदि किसी पीड़िता को 24 घंटे के भीतर बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करना संभव न हो, तो तत्काल लिखित रिपोर्ट समिति को उपलब्ध कराई जाए। किसी भी मामले में धाराओं में बदलाव होने पर भी संबंधित थानों को बाल कल्याण समिति को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा।

महिला और बाल सुरक्षा को लेकर अहम निर्देश

बैठक में वन स्टॉप सेंटर और बाल आश्रय गृहों से जुड़े मामलों पर भी दिशा-निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों से कहा गया कि नाबालिग बालिकाओं को वन स्टॉप सेंटर में दाखिल करते समय आवश्यक दस्तावेज साथ लाना सुनिश्चित करें और उन्हें पांच दिन से अधिक वहां न रखा जाए।

बाल आश्रय गृह में दाखिले से पहले बालिकाओं का प्रेग्नेंसी परीक्षण कराने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही सभी थानों को निर्देशित किया गया कि बालक-बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के समक्ष निर्धारित प्रपत्रों के साथ 24 घंटे के भीतर पेश किया जाए।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी भी बच्चे या महिला को थाने में रातभर नहीं रोका जाएगा।

कई अधिकारी और सदस्य रहे मौजूद

बैठक में बाल कल्याण समिति के सदस्य एवं प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट मिलिंद द्विवेदी, डिप्टी लीगल चीफ जय सिंह यादव, सीओ सदर अरुण कुमार नौहवार, जेजेबी सदस्य श्रीमती मीनू श्रीवास्तव, सहायक अभियोजन अधिकारी योगेंद्र, वन स्टॉप सेंटर से आस्था ज्योति, विधि संपरीक्षा अधिकारी प्रज्ञा, संरक्षण अधिकारी वीरेंद्र पाल, एएचटी थाना से एसआई शैलेन्द्र, हेड महिला आरक्षी संगीता मिश्रा समेत सभी थानों के बाल कल्याण अधिकारी मौजूद रहे।

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