रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग में 30 दिवसीय मूल्यवर्धित कार्यक्रम का समापन

बरेली,14 मई।महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के क्षेत्रीय अर्थशास्त्र विभाग द्वारा ऑनलाइन मोड पर आयोजित 30 दिवसीय मूल्यवर्धित कार्यक्रम (वैल्यू एडेड प्रोग्राम) का कल समापन सत्र संपन्न हो गया। इस कार्यक्रम का विषय ‘सतत विकास लक्ष्य: समावेशी और सुदृढ़ भविष्य की ओर’ रहा।

समापन सत्र की शुरुआत डॉ. जानकी द्वारा सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ की गई। तत्पश्चात डॉ. रिजवान कासिम ने संपूर्ण कार्यक्रम की संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. के. पी. सिंह ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम छात्र-छात्राओं में सतत विकास लक्ष्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले सभी विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रोफेसर अरुण दिवाकर नाथ बाजपाई, पूर्व कुलपति, अटल बिहारी बाजपाई विश्वविद्यालय ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारत प्राचीन काल से ही अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, पर्यावरणीय नैतिकता तथा सामुदायिक जीवन पद्धति के माध्यम से सतत विकास के अनेक सिद्धांतों का पालन करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि सभी देशों की भौगोलिक स्थिति, स्थलाकृति तथा जनसांख्यिकी अलग-अलग होने के बावजूद उनके लिए समान लक्ष्य निर्धारित कर देना, सतत विकास लक्ष्यों की एक बड़ी कमजोरी है। उन्होंने आगे कहा कि असामान्य परिस्थितियों में कम उपभोग और सामान्य परिस्थितियों में अधिक उपभोग पर ध्यान देने के बजाय, हमें सदैव सीमित एवं संतुलित उपभोग पर ध्यान देना चाहिए तथा स्वदेशी जीवन शैली अपनानी चाहिए।

प्रोफेसर आशुतोष प्रिय ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि सतत विकास के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि सरकार के प्रयासों के साथ-साथ जनमानस की भी सक्रिय भागीदारी हो, ताकि शीघ्र ही सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सके।
30 दिवसीय इस मूल्यवर्धित कार्यक्रम में सतत विकास के 17 उद्देश्यों पर विस्तृत व्याख्यान आयोजित किए गए। साथ ही, छात्र-छात्राओं को सतत विकास लक्ष्यों के प्रति जागरूक करने हेतु अन्य संबंधित विषयों पर भी व्याख्यान दिए गए। इन व्याख्यानों को देश-विदेश के विभिन्न विषयों के विद्वान विशेषज्ञों ने प्रतिदिन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर डॉ रुचि द्विवेदी, डॉ. अजीत सिंह, डॉ. इसरार खान, डॉ. सुबोध धवन, प्रो. एम. एल. मोर्य, आदित्य गौतम, विश्वजीत प्रजापति एवं विभाग के सभी सदस्यों की कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भागीदारी रही।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
