‘गांधीवादी स्वदेशी नीति ही बचा सकती है देश की अर्थव्यवस्था’, विजय कुमार लाल श्रीवास्तव का बड़ा बयान

लखनऊ: स्वदेशी विचार जागृति अभियान के राष्ट्रीय संयोजक विजय कुमार लाल श्रीवास्तव ने देश की वर्तमान आर्थिक नीतियों पर चिंता जताते हुए कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था गांधीवादी सोच और स्वदेशी सिद्धांतों से लगातार दूर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज देश बहुराष्ट्रीय कंपनियों और पूंजीवादी देशों के लिए एक बड़े बाजार के रूप में बदलता जा रहा है, जिससे आर्थिक आत्मनिर्भरता कमजोर पड़ रही है।

विजय कुमार लाल श्रीवास्तव ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण को याद करते हुए कहा कि उनके समाजवादी और जनहित आधारित विचार आज भी देश के लिए प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान आर्थिक ढांचा आम लोगों, छोटे व्यापारियों और स्थानीय उद्योगों के हित में नहीं दिखाई देता।
‘स्वदेशी नीति से ही मजबूत होगी अर्थव्यवस्था’
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वदेशी, आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादन आधारित अर्थव्यवस्था का सपना देखा था। लेकिन आज की नीतियों में विदेशी कंपनियों और पूंजीवादी मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका असर देश के छोटे उद्योगों, कुटीर व्यवसायों और रोजगार पर पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि देश को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है तो गांधीजी की स्वदेशी नीतियों को फिर से अपनाना होगा। स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने, छोटे उद्योगों को संरक्षण देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।

लोकनायक जेपी के विचार आज भी प्रासंगिक
विजय कुमार लाल श्रीवास्तव ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने हमेशा समाज आधारित व्यवस्था और जनसरोकारों की राजनीति की बात की थी। आज देश को फिर से वैसी ही सोच की आवश्यकता है, जिसमें आम जनता, किसान, मजदूर और छोटे कारोबारी केंद्र में हों।
उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियों में संतुलन और स्वदेशी मॉडल को प्राथमिकता देकर ही भारत को आत्मनिर्भर और मजबूत बनाया जा सकता है।
