यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: मंत्रियों के बदले जिला प्रभार, सीएम और दोनों डिप्टी सीएम संभालेंगे 25-25 जिलों की जिम्मेदारी


लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए मंत्रियों के जिला प्रभारों में व्यापक फेरबदल किया है। सरकार की ओर से जारी नई सूची के तहत मंत्रिमंडल के सदस्यों और राज्यमंत्रियों को नए जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हाल ही में मंत्रिमंडल में शामिल किए गए नए चेहरों को भी महत्वपूर्ण जिलों का प्रभार दिया गया है। राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना को राजधानी लखनऊ और वाराणसी जिले का प्रभार सौंपा गया है। वहीं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही अब अयोध्या और बस्ती जिलों की जिम्मेदारी संभालेंगे। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को प्रयागराज और गोरखपुर जिलों का प्रभारी बनाया गया है।
कैबिनेट मंत्रियों को मिले नए जिले
नई व्यवस्था के तहत बेबी रानी मौर्य को इटावा और हाथरस, लक्ष्मी नारायण चौधरी को अलीगढ़ और फिरोजाबाद, जयवीर सिंह को झांसी और फर्रुखाबाद, धर्मपाल सिंह को गाजियाबाद और रामपुर की जिम्मेदारी दी गई है। नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ को मिर्जापुर और चित्रकूट, अनिल राजभर को आजमगढ़ और सिद्धार्थनगर, राकेश सचान को रायबरेली और कन्नौज, अरविंद कुमार शर्मा को जौनपुर और भदोही का प्रभार सौंपा गया है।
इसके अलावा योगेंद्र उपाध्याय को कानपुर नगर, आशीष पटेल को गोंडा, संजय निषाद को कानपुर देहात, ओम प्रकाश राजभर को अंबेडकरनगर, दारा सिंह चौहान को कुशीनगर और श्रावस्ती, सुनील कुमार शर्मा को सहारनपुर तथा अनिल कुमार को मुरादाबाद जिले की जिम्मेदारी दी गई है।
सीएम और दोनों डिप्टी सीएम को 25-25 जिलों की निगरानी
नई व्यवस्था में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों को 25-25 जिलों की निगरानी एवं समन्वय का दायित्व सौंपा गया है। मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में विकास कार्यों की समीक्षा, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और संगठनात्मक समन्वय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
राज्यमंत्रियों को भी सौंपी गई अहम जिम्मेदारियां

राज्यमंत्री नितिन अग्रवाल को लखीमपुर खीरी, कपिल देव अग्रवाल को बिजनौर, रविंद्र जायसवाल को गाजीपुर, संदीप सिंह को मथुरा और गुलाब देवी को अमरोहा जिले का प्रभार दिया गया है। गिरीश चंद्र यादव को सुल्तानपुर, धर्मवीर प्रजापति को मैनपुरी, असीम अरुण को हरदोई और मेरठ, जेपीएस राठौर को संभल और बरेली की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके साथ ही नरेंद्र कुमार कश्यप को शाहजहांपुर, दयाशंकर सिंह को देवरिया और मऊ, दिनेश प्रताप सिंह को बांदा और बहराइच, अरुण कुमार सक्सेना को बदायूं तथा दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ को बलिया और महराजगंज जिले का प्रभारी बनाया गया है।
सामाजिक और जातीय समीकरणों पर भी नजर
सरकार के इस फैसले में सामाजिक और जातीय समीकरणों को भी ध्यान में रखे जाने की चर्चा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कई मंत्रियों को ऐसे जिलों की जिम्मेदारी दी गई है जहां उनके समाज या समुदाय का प्रभाव अधिक माना जाता है। इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न वर्गों के बीच राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
इसी क्रम में राज्यमंत्री कैलाश राजपूत को एटा जिले का प्रभारी बनाया गया है, जहां लोध समुदाय का प्रभाव उल्लेखनीय माना जाता है। वहीं कृष्णा पासवान को कौशांबी की जिम्मेदारी दी गई है, जहां पासी समाज की महत्वपूर्ण उपस्थिति है। वाल्मीकि समाज से आने वाले मंत्री सुरेंद्र दिलेर को बुलंदशहर का प्रभार सौंपा गया है। राजनीतिक जानकार इसे संबंधित क्षेत्रों में सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
पुराने प्रभारों में भी किया गया बदलाव
सरकार ने कई मंत्रियों के पूर्व प्रभारों में भी संशोधन किया है। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के पास पहले अयोध्या और बहराइच जिले थे, लेकिन अब बहराइच की जगह उन्हें बस्ती जिले की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं लक्ष्मी नारायण चौधरी से कासगंज का प्रभार वापस लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को सौंपा गया है। लक्ष्मी नारायण चौधरी को अब फिरोजाबाद जिले का दायित्व दिया गया है।
गौरतलब है कि इससे पहले लोकसभा चुनाव के बाद सितंबर 2024 में भी मंत्रियों के जिला प्रभारों में बदलाव किया गया था। अब एक बार फिर हुए इस फेरबदल को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों, प्रशासनिक सक्रियता और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
