हस्ताक्षर जालसाजी मामले में अभिषेक बनर्जी से 6 घंटे पूछताछ: CID मुख्यालय से निकलते ही ममता बनर्जी से की मुलाकात, सियासत गरमाई
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल मचाने वाले कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से गुरुवार को सीआईडी ने करीब छह घंटे तक लंबी पूछताछ की। देर रात पूछताछ समाप्त होने के बाद वह सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंचे, जिससे राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद अभिषेक बनर्जी शाम करीब 5:50 बजे भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय पहुंचे थे। पूछताछ का सिलसिला देर रात तक चला और वह लगभग 11:30 बजे वहां से बाहर निकले। इस दौरान उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।

तीन समन के बाद पहली बार हुए पेश
सीआईडी इससे पहले अभिषेक बनर्जी को तीन बार समन जारी कर चुकी थी। हालांकि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों और हाईकोर्ट में लंबित याचिका का हवाला देते हुए पेशी से छूट मांगी थी। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला मौका है जब उन्हें किसी राज्य जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होना पड़ा है।
एयरपोर्ट पर हुई नारेबाजी, सुरक्षा के बीच पहुंचे CID दफ्तर
दिल्ली दौरे से लौटने के बाद गुरुवार शाम अभिषेक बनर्जी कोलकाता पहुंचे। बताया गया कि वह पिछले तीन दिनों से राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न विपक्षी नेताओं, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल थे, के साथ बैठकों में हिस्सा ले रहे थे। कोलकाता एयरपोर्ट पर उनके पहुंचने पर कुछ लोगों ने नारेबाजी करते हुए ‘सिग्नेचर चोर’ के नारे लगाए। इसके बाद वह अपने आवास पहुंचे और फिर तय समय सीमा के भीतर कड़ी सुरक्षा के बीच सीआईडी मुख्यालय पहुंचे।
क्या है पूरा हस्ताक्षर जालसाजी विवाद?
सीआईडी के अनुसार 20 मई को अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर विधानसभा में विपक्ष के नेता और अन्य पदों के लिए पार्टी की अनुशंसाओं की पुष्टि की थी। इस पत्र में सोभनदेब चट्टोपाध्याय, असीम पात्रा, नैना बंद्योपाध्याय और फिरहाद हकीम के नाम शामिल थे।

विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत करते हुए दावा किया कि 6 मई की पार्टी बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था। दोनों ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव से जुड़े दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किए गए और हस्ताक्षरों की जालसाजी की गई।
फोरेंसिक जांच के लिए मांगी गई मूल प्रस्ताव पुस्तिका
जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया था कि वह प्रस्ताव पुस्तिका की मूल प्रति अपने साथ लेकर आएं, ताकि दस्तावेजों पर मौजूद हस्ताक्षरों की सत्यता की फोरेंसिक जांच कराई जा सके। इससे पहले विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत पर हरे स्ट्रीट थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था।
जांच जारी, कई पहलुओं की पड़ताल में जुटी CID
सीआईडी फिलहाल मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। दस्तावेजों की प्रामाणिकता, हस्ताक्षरों की सत्यता और कथित प्रस्ताव प्रक्रिया को लेकर एजेंसी लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
