‘युवा हमारी ताकत, न संभाला तो बन जाएंगे बोझ’: मोहन भागवत का बड़ा बयान, लोकतंत्र में विरोध को बताया जरूरी
नई दिल्ली: भारत आज आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में तिरंगा फहराया। उन्होंने कहा कि भारत स्वतंत्र था, स्वतंत्र है और स्वतंत्र रहेगा। हालांकि, देश को सुरक्षित, समृद्ध और विश्वगुरु बनाने के लिए कई चुनौतियों का सामना करना होगा।
भागवत ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। देश को ऐसा राष्ट्र बनाने की जरूरत है, जो पूरी मानवता के लिए सार्थक योगदान कर सके। उन्होंने कहा कि अपने मूल सिद्धांतों से जुड़े रहते हुए देश को सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करना होगा।

‘युवा हमारा जनसांख्यिकीय लाभांश’
मोहन भागवत ने युवाओं को देश का जनसांख्यिकीय लाभांश बताया। उन्होंने कहा कि युवा हमारी ताकत हैं और अगर उन्हें सही तरीके से संभाला गया तो देश को इसका फायदा मिलेगा। लेकिन यदि इस शक्ति का उचित इस्तेमाल नहीं हुआ तो यही युवा समाज पर बोझ बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि देश स्वतंत्र हो चुका है और स्वतंत्र ही रहेगा, लेकिन राष्ट्र को सुखी, संपन्न और सुरक्षित बनाना हमारी जिम्मेदारी है। भारत को ऐसा राष्ट्र बनाना होगा, जो दुनिया में सार्थक योगदान दे सके। इसके लिए देश के सामने मौजूद कई चुनौतियों का मिलकर सामना करना होगा।
मूल सिद्धांतों से जुड़े रहकर चुनौतियों का सामना

भागवत ने कहा कि देश में ऐसे लोग भी हैं जिनके विचार हमारे मूल विचारों से अलग हैं। इसके बावजूद भारत को अपने मूल सिद्धांतों से जुड़े रहते हुए इन चुनौतियों का सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाना केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि देशवासियों का कर्तव्य भी है।
लोकतंत्र में विरोध करना भी जरूरी
आरएसएस प्रमुख ने लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों के महत्व पर भी बात की। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न विचारों का होना लोकतंत्र की पहचान है। कई बार विरोध करना भी जरूरी होता है। यदि जनता के हित से जुड़े सवाल हैं तो उन्हें मजबूती से उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विरोध और आंदोलन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन विरोध करते समय अपनी जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। भागवत ने बाबा साहेब डॉ. बीआर अंबेडकर का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान का निर्माण करते समय उन्होंने इन सभी पहलुओं का ध्यान रखा था और हमें भी इन्हें याद रखना चाहिए।
