होर्मुज में फंसे 11 हजार से ज्यादा नाविकों को निकालने का मिशन शुरू, सैकड़ों जहाजों के सहारे चलेगा मेगा रेस्क्यू ऑपरेशन
lucknow: होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 11 हजार से अधिक नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बड़े पैमाने पर निकासी अभियान शुरू कर दिया गया है। हालिया क्षेत्रीय तनाव और समुद्री सुरक्षा संकट के बीच यह अब तक के सबसे बड़े समुद्री राहत अभियानों में से एक माना जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्था ने इस अभियान की पुष्टि करते हुए बताया है कि सैकड़ों जहाजों की मदद से समुद्री कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाएगा।
शांति समझौते के बाद शुरू हुई राहत प्रक्रिया

अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते के बाद क्षेत्र में हालात सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसी क्रम में होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे नाविकों और जहाजों को सुरक्षित निकालने की योजना पर काम शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य समुद्री यातायात को दोबारा सामान्य करना और वैश्विक व्यापार मार्गों पर भरोसा बहाल करना है।
500 से 600 जहाज होंगे अभियान का हिस्सा
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संस्था के अनुसार इस विशेष अभियान में करीब 500 से 600 व्यावसायिक जहाजों को शामिल किया जाएगा। एजेंसी ने संबंधित जहाजों से संपर्क करना शुरू कर दिया है और निकासी की विस्तृत योजना तैयार की जा रही है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि फंसे हुए नाविकों को चरणबद्ध तरीके से सुरक्षित क्षेत्रों में पहुंचाया जाए।
युद्ध के बाद बुरी तरह प्रभावित हुई थी आवाजाही
संघर्ष शुरू होने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 130 जहाजों का आवागमन होता था। हालांकि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सुरक्षा खतरों के कारण यह संख्या घटकर केवल 20 से 30 जहाज प्रतिदिन रह गई थी। अब निकासी अभियान के साथ समुद्री यातायात में धीरे-धीरे सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
बारूदी सुरंगों और सुरक्षा खतरों को लेकर अलर्ट
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि समुद्री मार्ग अभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। जलक्षेत्र में बारूदी सुरंगों और नौवहन संबंधी चुनौतियों का खतरा बना हुआ है। इसी वजह से जहाजों के कप्तानों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने के बजाय केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।

विशेष ट्रांजिट समूहों में होगी आवाजाही
निकासी अभियान को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए प्रत्येक जहाज को विशेष ट्रांजिट समूहों में शामिल किया जाएगा। हर समूह को अलग-अलग दिन और निर्धारित मार्ग आवंटित किए जाएंगे ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या सुरक्षा जोखिम से बचा जा सके।
संघर्ष में 14 नाविकों की जा चुकी है जान
मध्य पूर्व में शुरू हुए संघर्ष के बाद जहाजों पर हुए हमलों में अब तक 14 नाविकों की मौत हो चुकी है। लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों ने समुद्री परिवहन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसका असर केवल क्षेत्रीय व्यापार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ा है।
वैश्विक बाजार की नजर अभियान पर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह निकासी अभियान सफल रहता है और समुद्री मार्ग सामान्य रूप से खुल जाते हैं तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार को बड़ी राहत मिल सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य में चल रहे इस बड़े राहत अभियान पर टिकी हुई है।
