Saturday, August 29, 2026
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बीबीएयू में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, शिक्षा के साथ नवाचार और उद्यमिता से विकसित भारत पर हुआ मंथन

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में प्रबंध अध्ययन विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का 6 अगस्त 2026 को समापन हुआ। ‘एनईपी 2020 : विकसित भारत के लिए शिक्षा में परिवर्तन और उत्कृष्टता को बढ़ावा’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के समापन सत्र में शिक्षा, नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता, सामाजिक न्याय और कृषि में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। समापन सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईसीएआर-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर, लखनऊ के निदेशक डॉ. टी. दामोदरन मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में फेडरल बैंक के गवर्नमेंट एंड इंस्टीट्यूशनल बिजनेस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एवं कंट्री हेड श्री अनूप थालाचल, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड कॉमर्स के संकायाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह और कार्यक्रम समन्वयक प्रो. तरुणा मंच पर मौजूद रहीं।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ हुई। इसके बाद विश्वविद्यालय कुलगीत का गायन किया गया। आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को पौधे भेंट कर स्वागत किया गया। कार्यक्रम समन्वयक प्रो. तरुणा ने दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और विभिन्न शैक्षणिक सत्रों, विचार-विमर्श, प्रमुख निष्कर्षों और आयोजन की उपलब्धियों की जानकारी दी।

शिक्षा के साथ उद्यमिता और नवाचार पर जोर

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच के साथ किसी अच्छे उद्देश्य को हासिल करने का प्रयास किया जाए तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने कहा कि विकसित और सशक्त भारत का निर्माण केवल आर्थिक प्रगति से संभव नहीं है, बल्कि सामाजिक, शैक्षिक, आध्यात्मिक और राजनीतिक समेत सभी क्षेत्रों में संतुलित एवं समन्वित विकास जरूरी है।

उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने और उन्हें समाज तथा राष्ट्रहित में उपयोग करने के लिए सक्षम बनाती है।

कुलपति ने युवाओं से केवल रोजगार हासिल करने तक सीमित न रहने और उद्यमिता तथा नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को वास्तविक अर्थों में विश्वगुरु बनाने के लिए ऐसे युवाओं की जरूरत है जो रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार के अवसर पैदा करें।

उन्होंने विद्यार्थियों को ‘अर्निंग व्हाइल लर्निंग’ का संदेश देते हुए कहा कि अध्ययन के साथ कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए, ताकि उनके ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग राष्ट्र निर्माण में हो सके।

कृषि को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने पर चर्चा

मुख्य अतिथि डॉ. टी. दामोदरन ने कहा कि भारत ने फसल उत्पादकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप नए मानदंड विकसित करना जरूरी है।

उन्होंने कृषि क्षेत्र में जैव ईंधन की बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए इसे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने पौधों में होने वाले रोगों की समय रहते पहचान, वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक अनुसंधान आधारित तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया।

डॉ. दामोदरन ने कहा कि कृषि के सतत विकास के लिए किसी एक विज्ञान या तकनीक तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाते हुए वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से लगातार सीखना जरूरी है। उन्होंने युवाओं और शोधार्थियों से नवाचार, अनुसंधान तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए कृषि क्षेत्र को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का आह्वान किया।

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तकनीकी ज्ञान के साथ मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखने की अपील

विशिष्ट अतिथि श्री अनूप थालाचल ने कहा कि बदलते वैश्विक परिवेश में सफलता के लिए केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। व्यक्तित्व में विनम्रता, दूरदर्शिता और लगातार सीखते रहने की क्षमता भी जरूरी है। उन्होंने युवाओं से उभरती प्रौद्योगिकियों के साथ खुद को लगातार अपडेट रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने ‘मैजिक ऑफ लिसनिंग’ यानी धैर्य और गंभीरता के साथ दूसरों को सुनने की कला को प्रभावी नेतृत्व, बेहतर संवाद और व्यक्तिगत विकास का आधार बताया। उनके मुताबिक इन गुणों को जीवन में अपनाकर युवा अपने करियर के साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

तीन तकनीकी सत्रों में शोध और सामाजिक न्याय पर चर्चा

संगोष्ठी के दूसरे दिन प्रतिभागियों के लिए प्लेनरी सत्र आयोजित किया गया। इसमें बीबीएयू के डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, स्कूल ऑफ एजुकेशन के संकायाध्यक्ष प्रो. राजशरण शाही, इग्नू नई दिल्ली के शिक्षा विभाग के प्रो. ए.के. झा और कार्यक्रम समन्वयक प्रो. तरुणा मौजूद रहीं।

इसके बाद प्रतिभागियों के लिए तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। पहले तकनीकी सत्र का विषय ‘अनुसंधान, नवाचार एवं उद्योग-शिक्षा समन्वय’ रहा। इसका आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज, लखनऊ के निदेशक प्रो. निशांत कुमार और बीबीएयू के प्रबंध अध्ययन विभाग के डॉ. सलिल सेठ के मार्गदर्शन में हुआ।

दूसरे तकनीकी सत्र में ‘समानता, समावेशन एवं सामाजिक न्याय’ विषय पर चर्चा हुई। इसका संचालन बीबीएयू के प्रो. सनातन नायक और डॉ. अर्पित शैलेश के दिशानिर्देशन में किया गया।

तीसरे तकनीकी सत्र में चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय, भिवानी की प्रो. सुनीता भरतवाल ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुईं। प्रो. सुनीता भरतवाल और बीबीएयू की डॉ. लता बाजपेई सिंह के मार्गदर्शन में ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी, आपातकालीन क्षेत्र एवं विविध विषय’ पर विचार-विमर्श किया गया।

शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण में उत्कृष्ट प्रतिभागी सम्मानित

समापन सत्र में शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। उनकी शैक्षणिक प्रतिभा और शोध के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी गईं।

अंत में आयोजन समिति की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर आभार व्यक्त किया गया। प्रो. अमित कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, गैर-शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

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