दिल्ली में TOD पॉलिसी से बनेंगे 12,500 नए फ्लैट, 5 साल में पूरा होगा प्रोजेक्ट; मेट्रो-RRTS के पास होंगे घर
नई दिल्ली: दिल्ली विकास प्राधिकरण अगले पांच वर्षों में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी TOD नीति के तहत 12,500 नए फ्लैट बनाने की तैयारी कर रहा है। इन आवासीय परियोजनाओं को मेट्रो, आरआरटीएस और रेलवे कॉरिडोर के आसपास विकसित किया जाएगा। योजना का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के आसपास आवासीय विकास को बढ़ावा देना और दिल्ली में यातायात के दबाव को कम करने में मदद करना है।
दिल्ली मास्टर प्लान 2047 को डीडीए बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया तेज की जाएगी। इसी के तहत TOD नीति के पहले चरण में 12,500 फ्लैटों का निर्माण प्रस्तावित है। डीडीए को इस योजना के लिए रियल एस्टेट क्षेत्र से करीब 100 आमंत्रण और आवेदन प्राप्त हुए हैं।

डीडीए से जुड़े सूत्रों के अनुसार TOD मास्टर प्लान 2047 का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत मेट्रो, आरआरटीएस और रेलवे कॉरिडोर के आसपास चिन्हित क्षेत्रों में आवासीय निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक स्थान पर करीब 125 फ्लैट तैयार करने की योजना है। डीडीए सीमित भूमि का बेहतर इस्तेमाल करते हुए अधिक आवासीय इकाइयां विकसित करने पर जोर दे रहा है।
14 मंजिला अपार्टमेंट बनाने की तैयारी
TOD परियोजना के तहत अलग-अलग स्थानों पर 14 मंजिला अपार्टमेंट और सोसाइटी विकसित करने की योजना है। डीडीए ने विभिन्न क्षेत्रों में TOD नीति के तहत लैंड पार्सल की पहचान कर ली है। इन जमीनों पर मास्टर प्लान के प्रावधानों और निर्धारित शर्तों के अनुसार काम आगे बढ़ाया जाएगा।
TOD नीति के तहत डीडीए एफएआर को 400 से बढ़ाकर 500 करने की तैयारी कर रहा है। इससे सीमित भूखंड पर अधिक निर्मित क्षेत्र का इस्तेमाल संभव होगा।
65 वर्गमीटर या उससे बड़े होंगे फ्लैट
योजना के तहत 5,000 वर्गमीटर के प्लॉट पर अधिक क्षमता के साथ बहुमंजिला आवासीय इमारतों का निर्माण किया जा सकेगा। प्रत्येक फ्लैट का आकार 65 वर्गमीटर या इससे अधिक रखने की योजना है।
दिल्ली को जाम से राहत देने पर जोर
डीडीए बोर्ड सदस्य राजीव बब्बर के अनुसार मास्टर प्लान 2047 प्रधानमंत्री के विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें दिल्ली के हरित क्षेत्र को बढ़ाने और शहरीकृत क्षेत्र के पुनर्गठन समेत कई पहलुओं को शामिल किया गया है।
मास्टर प्लान में दिल्ली को यातायात जाम से राहत दिलाना भी प्रमुख लक्ष्य है। इसके लिए सड़क व्यवस्था और परिवहन प्रणाली से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं पर भी काम किया जाएगा।
झुग्गीवासियों के लिए बनेंगे 28 हजार फ्लैट
डीडीए के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक मास्टर प्लान के प्रावधानों के तहत झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों के लिए भी अतिरिक्त मकान और फ्लैट बनाए जाएंगे। इसके लिए कुछ स्थानों को चिह्नित कर काम शुरू किया जा चुका है।

दिल्ली में 19 झुग्गी क्लस्टर की पहचान की गई है और भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। योजना के तहत इन झुग्गी क्लस्टरों में अगले पांच से छह वर्षों के दौरान करीब 28 हजार फ्लैट बनाने का लक्ष्य है।
पुराने डीडीए फ्लैटों के पुनर्निर्माण में निजी कंपनियां जुड़ेंगी
डीडीए के 50 वर्ष पुराने दो मंजिला फ्लैटों के पुनर्निर्माण की नीति को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत नए फ्लैट बनाने के लिए निजी रियल एस्टेट कंपनियों के साथ साझेदारी की जाएगी।
योजना के तहत डीडीए निजी कंपनियों को एफएआर बढ़ाकर देगा और पुराने फ्लैटों के पुनर्निर्माण के लिए लाइसेंस भी उपलब्ध कराएगा। सोसाइटी और अपार्टमेंट में रहने वाले लोग कंपनियों के साथ मिलकर पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में भागीदारी करेंगे। पूरी प्रक्रिया की निगरानी डीडीए करेगा।
डीडीए बाजारों को लेकर व्यापारियों ने दिए 14 सुझाव
डीडीए के बाजारों से जुड़े व्यापारियों ने मास्टर प्लान में अपनी 14 मांगों को शामिल करने का अनुरोध किया है। डीडीए मार्केट्स जॉइंट एक्शन कमेटी से जुड़े ऋषभ जैन और अन्य प्रतिनिधियों के अनुसार दिल्ली में करीब 1,000 डीडीए बाजार हैं।
इनमें स्थानीय खरीदारी केंद्र, सामुदायिक खरीदारी केंद्र और अन्य वाणिज्यिक केंद्र शामिल हैं। कई बाजार 25 से 30 वर्ष पुराने हो चुके हैं। बाजारों से जुड़ी समस्याओं और विकास की जरूरतों को लेकर केंद्र सरकार और डीडीए के सामने 14 सूत्रीय सुझाव और मांगें रखी गई हैं।
125 गांवों की सड़कों को 100 फुट चौड़ा करने की मांग
दिल्ली के नए शहरीकृत गांवों के निवासियों ने मास्टर प्लान 2047 में आवागमन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की मांग की है। दिल्ली पंचायत संघ के प्रमुख थान सिंह यादव ने कहा कि 125 गांवों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग और फिरनी रोड को 100 फुट तक चौड़ा किया जाना जरूरी है।
उनका कहना है कि मौजूदा समय में सीमित सड़क व्यवस्था के कारण गांवों में आवाजाही में परेशानी होती है। उन्होंने ग्राम सभा की कृषि भूमि को अधिग्रहण से बाहर रखने और उसका इस्तेमाल गांवों की सुविधाओं के विकास में करने की मांग भी रखी है।
