दिल्ली पुलिस ने 3 महीने पहले ही दे दिया था अलर्ट, सत्य निकेतन बिल्डिंग गिरने के बाद वायरल हुई चिट्ठी; जानें क्या लिखा था
नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक हादसे को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस ने हादसे से करीब तीन महीने पहले ही इलाके की इमारतों में सुरक्षा व्यवस्था और खासतौर पर आग से जुड़े खतरों को लेकर चिंता जताई थी। पुलिस ने महरौली के एसडीएम को भेजी चिट्ठी में सत्य निकेतन इलाके में जल्द कार्रवाई करने की सलाह दी थी।
यह चेतावनी हौज रानी में एक बेड एंड ब्रेकफास्ट में लगी भीषण आग की जांच के बाद दी गई थी। उस हादसे में 23 लोगों की मौत हुई थी। इसके करीब दो सप्ताह बाद 17 जून को साउथ कैंपस थाने के एसएचओ ने महरौली के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट को पत्र भेजा था। सत्य निकेतन में पिछले रविवार को एक बहुमंजिला हॉस्टल गिरने से 5 छात्रों समेत सात लोगों की मौत हुई थी।

चिट्ठी में पीजी और कैफे को लेकर जताई गई थी चिंता
पुलिस की ओर से भेजी गई चिट्ठी में कहा गया था कि सत्य निकेतन इलाके में कई पेइंग गेस्ट आवास और कैफे बिना फायर सेफ्टी एनओसी और जरूरी अग्नि सुरक्षा उपायों के संचालित हो रहे हैं। पत्र में इन समस्याओं को दूर करने के लिए संबंधित विभाग से निरीक्षण कराने की बात कही गई थी।
पुलिस ने ऐसे निरीक्षण के दौरान सहयोग देने की भी पेशकश की थी। पत्र के अंत में जन सुरक्षा, स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का उल्लेख करते हुए मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया था।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पत्र भेजे जाने की पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने इसे एक नियमित पत्र बताया और स्पष्ट किया कि यह पत्र उस विशेष इमारत को लेकर नहीं भेजा गया था, जो बाद में ढह गई।
एसडीएम ने कहा- हमें चिट्ठी नहीं मिली
महरौली के एसडीएम राहुल राठौड़ ने दिल्ली पुलिस की ओर से भेजी गई चिट्ठी मिलने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कोई पत्र नहीं मिला। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जताई कि पत्र कार्यालय में आया हो और आगे दिल्ली नगर निगम को भेज दिया गया हो, क्योंकि कार्रवाई की जिम्मेदारी निगम की थी।
दिल्ली नगर निगम ने इस पत्र से जुड़े सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया। हौज रानी की आग के बाद सरकार ने निरीक्षण और कार्रवाई के लिए दिल्ली नगर निगम समेत विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों वाली 13 जिला स्तरीय कमेटियां गठित की थीं।
सत्य निकेतन पीजी के पास फायर एनओसी नहीं थी
जांच में सामने आया कि सत्य निकेतन के जिस पीजी में हादसा हुआ, उसके पास फायर एनओसी नहीं थी। अधिकारियों के मुताबिक हादसे के बाद किए गए शुरुआती सर्वे में सत्य निकेतन और मोती बाग इलाके में कम से कम 20 ऐसी बहुमंजिला इमारतें मिलीं, जिन्हें फायर एनओसी की जरूरत थी, लेकिन उन्होंने इसके लिए आवेदन तक नहीं किया था।
इनमें से ज्यादातर इमारतों का इस्तेमाल छात्रों के रहने के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों के अनुसार इलाके में केवल तीन रेस्टोरेंट को दिल्ली फायर सर्विस से मंजूरी मिली हुई थी।
दिल्ली फायर सर्विस के नियमों के मुताबिक 17.5 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों, 50 से ज्यादा लोगों के बैठने की क्षमता वाले रेस्टोरेंट और कुछ अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए फायर एनओसी जरूरी है। जानकारों के मुताबिक फायर सेफ्टी की मंजूरी नहीं होने का मतलब कई मामलों में दूसरे नियमों का उल्लंघन भी हो सकता है।
इमारत में मिलीं कई संरचनात्मक खामियां
इमारत गिरने के बाद जांच में कई संरचनात्मक कमियां सामने आई हैं। हालांकि दिल्ली नगर निगम का कहना है कि उसके रिकॉर्ड में इस इमारत के खिलाफ अवैध निर्माण का कोई मामला दर्ज नहीं था।
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पुलिस की एफआईआर के मुताबिक लालच में आकर इमारत के मालिक और उसके भाई ने करीब 50 साल पुरानी इमारत में चार अवैध मंजिलें बना दी थीं। पुलिस का आरोप है कि उन्हें पता था कि अतिरिक्त भार के कारण इमारत की नींव प्रभावित हो सकती है।
जांचकर्ताओं के मुताबिक हादसे वाले दिन दुकान के लिए जगह बनाने के उद्देश्य से भूतल की एक दीवार हटाई गई थी। इसी के बाद इमारत ढह गई। अधिकारियों ने बताया कि दीवार हटाने के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
दीवार हटाते ही ढही इमारत, मलबे में दबे छात्र और मजदूर
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इमारत मालिक के बेटे महेश गुप्ता की ओर से काम के लिए रखे गए लेबर कॉन्ट्रैक्टर ने जांचकर्ताओं को बताया कि हादसे से करीब डेढ़ घंटे पहले एक प्लंबर वहां आया था। उसने दीवार नहीं तोड़ने की सलाह दी थी।
अधिकारी के मुताबिक कॉन्ट्रैक्टर सनोज कुमार ने प्लंबर से कहा कि मालिक ने दीवार तोड़ने के लिए कहा है और उसे यह काम करना ही होगा। इसके बाद दीवार तोड़ी गई और इमारत ढह गई। मलबे में छात्र और मजदूर दब गए।
हादसे में दिल्ली विश्वविद्यालय के 5 छात्रों और 2 मजदूरों की मौत हुई। करीब 28 घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद 12 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
हादसे में 5 लोग गिरफ्तार, अग्रिम जमानत भी खारिज
मामले में अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला, उनके बेटे महेश और लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज कुमार शामिल हैं। इसके अलावा सुधांशु लवनीश को भी गिरफ्तार किया गया है। उसने शुभम त्यागी के साथ मिलकर गुप्ता परिवार से पीजी चलाने के लिए इमारत किराए पर ली थी।
दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को शुभम त्यागी की अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी।
दिल्ली में पीजी के लिए नई नीति बनाने की तैयारी
जांचकर्ताओं के मुताबिक सुधांशु ने बताया कि हादसे से करीब छह-सात दिन पहले उसने महेश गुप्ता को फोन कर निर्माण कार्य के बारे में पूछा था। महेश ने कथित तौर पर कहा था कि वह छोटा-मोटा काम करवा रहा है। सुधांशु ने भूतल पर किसी व्यावसायिक गतिविधि की योजना पर आपत्ति जताई थी, लेकिन महेश ने कहा था कि फुर्सत मिलने पर वह इस बारे में बात करेगा।
6 सितंबर को सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली सरकार ने नगर निगम को पूरे शहर में जांच करने और बिना मंजूरी किए गए निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। इस अभियान के दौरान कई इमारतें गिराई गईं और कुछ अधिकारियों को निलंबित भी किया गया। दिल्ली सरकार ने राजधानी में पीजी को नियमित करने के लिए दो महीने के भीतर एक व्यापक नीति तैयार करने की योजना का भी ऐलान किया है।

