बीबीएयू में हिंदी के विस्तार पर मंथन, विभागाध्यक्षों ने उच्च शिक्षा में प्रयोग बढ़ाने पर दिया जोर

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ के तहत 16 सितंबर 2026 को विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अकादमिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने, पाठ्यक्रमों में हिंदी की भूमिका बढ़ाने और भाषा के सामने मौजूद चुनौतियों व संभावनाओं पर चर्चा की गई।

उच्च शिक्षा में हिंदी के उपयोग को बढ़ाने पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में प्रो. सुदर्शन वर्मा, प्रो. वेंकटेश दत्ता, प्रो. एम.एल. मीणा, प्रो. शरद सोनकर और डॉ. प्रीति राय प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय के विभिन्न क्षेत्रों में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करना और विद्यार्थियों व शिक्षकों के बीच हिंदी के प्रति रुचि बढ़ाने के उपायों पर विचार करना रहा।
विभागाध्यक्षों ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी के बढ़ते महत्व और इसके व्यावहारिक उपयोग को लेकर अपने विचार साझा किए। इस दौरान चर्चा हुई कि अलग-अलग विषयों के पाठ्यक्रमों में हिंदी की उपयोगिता को किस तरह और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
विज्ञान, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा में हिंदी को बढ़ावा देने पर जोर
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हिंदी को केवल भाषा और साहित्य तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, विधि, तकनीकी और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी हिंदी को अध्ययन-अध्यापन और अकादमिक लेखन के माध्यम के रूप में बढ़ावा दिया जा सकता है।
इसके लिए विषय आधारित हिंदी संदर्भ सामग्री, पाठ्य पुस्तकों, शोध सामग्री और डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
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हिंदी के सामने चुनौतियों पर भी हुआ विचार-विमर्श
संवाद कार्यक्रम में हिंदी के समक्ष मौजूद वर्तमान चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वैश्विक स्तर पर अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव, उच्च शिक्षा और रोजगार में अंग्रेजी की प्राथमिकता, तकनीकी व वैज्ञानिक विषयों के लिए गुणवत्तापूर्ण हिंदी सामग्री की कमी और विद्यार्थियों में हिंदी के व्यावहारिक प्रयोग को लेकर बनी धारणाओं को प्रमुख चुनौतियों के रूप में सामने रखा गया।
विभागाध्यक्षों ने विश्वविद्यालय स्तर पर हिंदी लेखकों, शोधार्थियों और रचनाकारों को प्रोत्साहित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। साथ ही अकादमिक और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को और प्रभावी बनाने के उपायों पर विचार किया गया।
भारतीय भाषाओं के समन्वय के साथ आगे बढ़े हिंदी का विकास
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि हिंदी का विकास अन्य भाषाओं के विरोध के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं के समन्वय और बहुभाषिकता की भावना के साथ किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में सहायक कुलसचिव श्री रामकुमार गुप्ता, डॉ. संध्या दीक्षित और विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष मौजूद रहे।

