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परिसीमन बिल पर मोदी सरकार के साथ आया अकाली दल, समर्थन के बाद फिर गठबंधन की अटकलें तेज

नई दिल्ली: परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार को शिरोमणि अकाली दल का समर्थन मिल गया है। भाजपा की पूर्व सहयोगी रही अकाली दल ने केंद्र के परिसीमन प्रस्ताव का समर्थन करने का ऐलान किया है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल के बीच मुलाकात हुई थी। इसके बाद शनिवार को पार्टी की वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में समर्थन का फैसला लिया गया।

महिला आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग

सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को पार्टी की बैठक के बाद सोशल मीडिया पर बताया कि अकाली दल देश में महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग करता है। पार्टी ने कहा कि वह महिलाओं की गरिमा, समानता और समान अधिकारों के सिद्धांतों में विश्वास रखती है।

बादल ने कहा कि संसद के सामने मौजूद प्रमुख मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श के बाद अकाली दल ने निष्पक्ष और न्यायसंगत परिसीमन की मांग की है, जिससे सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिल सके। पार्टी ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें सभी राज्यों की सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान है।

अप्रैल में बिल का विरोध कर चुका है अकाली दल

अकाली दल का मौजूदा रुख उसके अप्रैल के रुख से अलग है। जब केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक लेकर आई थी, तब अकाली दल ने इसका विरोध किया था और विपक्ष के साथ मिलकर विधेयक के खिलाफ मतदान किया था।

उस समय अकाली दल के नेताओं ने विधेयक को पंजाब के साथ धोखा बताया था। उनका तर्क था कि प्रस्तावित बदलाव से पड़ोसी राज्यों की संसदीय सीटों में बढ़ोतरी होगी, जबकि पंजाब को नुकसान उठाना पड़ सकता है। विधेयक पर चर्चा के दौरान गृहमंत्री की ओर से सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की बात पर सहमति जताए जाने के बावजूद अकाली दल ने मतदान में विपक्ष का साथ दिया था।

मोदी-बादल मुलाकात के बाद बदला रुख

सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इसके अगले दिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक हुई और परिसीमन विधेयक को समर्थन देने का फैसला सामने आया। इस घटनाक्रम को भाजपा और अकाली दल के बीच राजनीतिक नजदीकी बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

पंजाब चुनाव से पहले फिर गठबंधन की चर्चा

अकाली दल के केंद्र के प्रस्ताव को समर्थन देने के बाद पंजाब में भाजपा और अकाली दल के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलें भी तेज हो गई हैं। दोनों दल लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन के तहत सत्ता में रहे हैं। करीब ढाई दशक पुराना भाजपा-अकाली गठबंधन वर्ष 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर टूट गया था।

गठबंधन टूटने के बाद दोनों दलों ने वर्ष 2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 का लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़ा। दोनों चुनावों में भाजपा और अकाली दल को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

गठबंधन में बराबरी की भूमिका चाहती है भाजपा

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल एक बार फिर साथ आने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। अकाली दल, भाजपा की राज्य इकाई और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गठबंधन के पक्ष में होने की चर्चा है।

हालांकि, गठबंधन की राह में सीट बंटवारा और राजनीतिक भूमिका सबसे बड़ी चुनौती हो सकती है। पिछले करीब ढाई दशक में भाजपा पंजाब में अकाली दल की कनिष्ठ सहयोगी की भूमिका में रही है। अब भाजपा गठबंधन में बराबरी की भूमिका चाहती है। ऐसे में दोनों दलों के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर नजर रहेगी।

 

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