Tuesday, October 13, 2026
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विजय थलपति की सर्वदलीय बैठक को बड़ा झटका, परिसीमन पर 37 सांसदों ने किया बायकॉट; DMK-AIADMK भी दूर

चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय थलपति की ओर से परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय सांसदों की बैठक को विपक्षी दलों के बहिष्कार से बड़ा झटका लगा है। राज्य के कुल 57 सांसदों में से 37 सांसदों ने बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है। बैठक शनिवार दोपहर 3 बजे बुलाई गई थी। DMK और AIADMK समेत कई दलों के सांसदों के शामिल नहीं होने के कारण इसमें करीब 20 सांसदों के ही पहुंचने की संभावना है।

57 में से 37 सांसद बैठक से बाहर

परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में कुल 57 सांसदों में से 37 के शामिल नहीं होने की बात सामने आई है। बैठक में आने वाले 20 सांसदों में कांग्रेस के 12, वीसीके के 2, सीपीआई के 2, सीपीआई(एम) के 2, एमडीएमके का 1 और आईयूएमएल का 1 सांसद शामिल है।

वहीं, बहिष्कार करने वाले सांसदों में अकेले डीएमके के सभी 30 सांसद हैं। इसके अलावा एआईएडीएमके के 4 सांसद और पीएमके, एमएनएम तथा डीएमडीके के एक-एक सांसद ने बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है।

DMK ने बैठक को बताया अनावश्यक

डीएमके सांसद कनिमोझी ने मुख्यमंत्री विजय की ओर से बुलाई गई बैठक को अनावश्यक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बैठक के जरिए कावेरी नदी से जुड़े अहम मुद्दे से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।

कनिमोझी ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से संसद के मौजूदा सत्र में परिसीमन विधेयक पेश करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। साथ ही संशोधित मसौदा विधेयक भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में उनके मुताबिक इस बैठक में चर्चा के लिए नया विषय ही नहीं है।

डीएमके सूत्रों ने कहा कि पार्टी मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में शामिल नहीं होगी। पार्टी का कहना है कि जब सरकार मेकेदातू मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाएगी, तभी डीएमके उसमें चर्चा के लिए शामिल होगी।

कांग्रेस बोली- तमिलनाडु के हितों को राजनीति से ऊपर रखें

बैठक के बहिष्कार के बीच कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि जो लोग अपनी राजनीति को तमिलनाडु के हितों से ऊपर रखते हैं, वे बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग तमिलनाडु को प्राथमिकता देते हैं और राजनीति को बाद में रखते हैं, वे मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेंगे।

टैगोर ने इसे पार्टी की राजनीति का मुद्दा मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह तमिलनाडु के अधिकारों, हितों और भविष्य से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता यह देख रही है कि जरूरत के समय तमिलनाडु के साथ कौन खड़ा रहा।

कांग्रेस तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम की सहयोगी है।

मुख्य सचिव ने सांसदों को भेजा था न्योता

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु के मुख्य सचिव एम. साई कुमार ने 6 और 7 अगस्त को सांसदों को अलग-अलग निमंत्रण भेजे थे। इसके बावजूद डीएमके समेत कई दलों ने बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया।

दक्षिणी राज्यों की सीटें घटने की आशंका

मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर तमिलनाडु का साझा और एकजुट रुख तय करने के उद्देश्य से यह बैठक बुलाई थी। नए परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में चिंता जताई जा रही है कि इसके बाद संसद में उनकी सीटों की संख्या कम हो सकती है।

लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों की यह बैठक शनिवार दोपहर 3 बजे चेन्नई के कलैवानर अरंगम में निर्धारित की गई थी।

क्या है परिसीमन विधेयक 2026?

परिसीमन विधेयक 2026 को 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इसका उद्देश्य संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का दोबारा सीमांकन करना, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना और महिला आरक्षण लागू करना था।

हालांकि, विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका। इसे पारित कराने के लिए सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत का समर्थन नहीं मिल पाया था।

 

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