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बीबीएयू के शोध में 50 वर्षों के पुस्तकालय अनुसंधान का विश्लेषण, डिजिटल संरक्षण सबसे प्रमुख विषय बनकर उभरा

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के शोधछात्र विक्रांत दुबे और सूचना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय की संकायाध्यक्ष प्रो. शिल्पी वर्मा का शोध पत्र प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में मशीन लर्निंग की मदद से पिछले पांच दशकों के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान अनुसंधान के प्रमुख विषयों का विश्लेषण किया गया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि अध्ययन की दिशा तय करने में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के व्यावहारिक उपयोगिता वाले शोध पर जोर और प्रोत्साहन की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

यह शोध पत्र DESIDOC Journal of Library & Information Technology के सितंबर 2026 के अंक में प्रकाशित हुआ है। यह खंड 46, अंक 5 में पृष्ठ 569 से 576 तक प्रकाशित किया गया है। स्कोपस/स्किमागो सूची में यह पत्रिका पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान श्रेणी की Q2 पत्रिका है। पत्रिका Scopus, Web of Science (ESCI), Dimensions, LISA, LISTA, EBSCO, ProQuest, Indian Citation Index और Google Scholar में अनुक्रमित है।

279 शोध प्रकाशनों का किया गया विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने वर्ष 1974 से 2024 के बीच प्रकाशित 279 स्कोपस-अनुक्रमित प्रकाशनों का अध्ययन किया। इसके लिए लेटेंट डिरिशले एलोकेशन (LDA) तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसके आधार पर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान अनुसंधान के पांच प्रमुख विषय-समूह सामने आए।

अध्ययन के अनुसार डिजिटल संरक्षण और पुस्तकालय सूचना विज्ञान से संबंधित शोध की हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत रही। वहीं बिब्लियोमेट्रिक अनुसंधान, डिजिटल पुस्तकालय सेवाएं और ऑनलाइन शिक्षण से जुड़े विषयों की हिस्सेदारी लगभग 20-20 प्रतिशत रही। उभरते रुझानों से जुड़े विषयों की हिस्सेदारी शेष 10 प्रतिशत रही।

शोध में सामने आया कि 1995 से पहले प्रकाशन गतिविधि सीमित थी। वर्ष 2000 के बाद इसमें बढ़ोतरी हुई और 2015 से 2020 के बीच यह अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची। यह वही अवधि है, जब एनडीएलआई और ई-शोधसिंधु की शुरुआत हुई।

डिजिटल संरक्षण के लिए मजबूत अवसंरचना पर जोर

अध्ययन में शोध निष्कर्षों के व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा की गई है। लेखकों के अनुसार डिजिटल संरक्षण से जुड़े शोध की प्रमुखता इस बात का संकेत है कि भारतीय पुस्तकालयों को OAIS और PREMIS जैसे वैश्विक मानकों तथा वितरित संरक्षण प्रतिरूपों को अपनाने की दिशा में काम करना चाहिए।

इसके साथ ही डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने, मेटाडेटा की गुणवत्ता बेहतर बनाने और दीर्घकालिक अभिलेखीय रणनीतियां विकसित करने की आवश्यकता बताई गई है।

बिब्लियोमेट्रिक और डिजिटल सेवाओं से जुड़े विषयों की निरंतर उपस्थिति को देखते हुए डेटा एनालिटिक्स, टेक्स्ट माइनिंग, विज़ुअलाइज़ेशन उपकरणों और डिजिटल सेवा संचालन में पेशेवर क्षमता विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को बताया उपयोगी

शोधकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझेदारियां मुक्त पहुंच प्रकाशन, डिजिटल संरक्षण और संगणकीय रूप से समृद्ध पुस्तकालय सेवाओं को बढ़ावा देने में मददगार साबित हो सकती हैं। टॉपिक मॉडलिंग से प्राप्त ऐसे परिणामों का इस्तेमाल पूरे पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान क्षेत्र में रणनीतिक नियोजन और क्षमता निर्माण के लिए किया जा सकता है।

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भारत और विदेशों में शोध के रुझानों की तुलना

शोध पत्र में भारतीय और वैश्विक स्तर पर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की तुलना भी की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजिटल संरक्षण का काम LOCKSS जैसी सहयोगी परियोजनाओं, OAIS आधारित मानकों और यूरोप की प्लान एस से संचालित हो रहा है। इसके साथ ही फाइल क्षरण का पूर्वानुमान लगाने और स्वतः मेटाडेटा तैयार करने वाले एआई उपकरणों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है।

भारत में एनडीएलआई की व्यापक डिजिटलीकरण परियोजनाओं, इनफ्लिबनेट के शोधगंगा जैसे संस्थागत भंडारों और रक्षा पुस्तकालयों की सुरक्षित अभिलेखीय प्रणालियों के जरिए प्रगति हुई है। हालांकि, एआई आधारित संरक्षण, स्वचालन और उन्नत एनालिटिक्स का इस्तेमाल अभी शुरुआती स्तर पर है।

बिब्लियोमेट्रिक्स और डिजिटल सेवाओं में भी अंतर

बिब्लियोमेट्रिक्स के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑल्टमेट्रिक्स, नेटवर्क विज़ुअलाइज़ेशन और एल्गोरिदमिक मैपिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि भारतीय शोध अभी मुख्य रूप से वर्णनात्मक स्वरूप का है।

डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में स्वयं (SWAYAM) और ई-शोधसिंधु जैसे मंच उपलब्ध हैं, लेकिन लर्निंग एनालिटिक्स का समावेश अभी काफी सीमित है।

एआई, एआर-वीआर और स्मार्ट पुस्तकालय अगली दिशा

अध्ययन में सबसे छोटे विषय-समूह को क्षेत्र की उभरती और अग्रिम दिशाओं से जोड़ा गया है। इसमें ब्लॉकचेन आधारित डिजिटल अधिकार प्रबंधन, एआई-सहायित सूचीकरण, एआर/वीआर अनुप्रयोग और स्मार्ट पुस्तकालय अवसंरचना जैसे विषय शामिल हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार ये क्षेत्र आने वाले समय में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विकास की नई दिशाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

शोध पत्र के प्रकाशन पर विभाग के अन्य शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने शोधछात्र विक्रांत दुबे तथा प्रो. शिल्पी वर्मा को बधाई और शुभकामनाएं दीं।

 

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