एमएसएमई के लिए सरकारी खरीद में बड़े अवसर, GeM पर 45 फीसदी हिस्सेदारी; लखनऊ में वेंडर विकास कार्यक्रम का शुभारंभ

लखनऊ: सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों को सरकारी खरीद और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से जोड़ने के उद्देश्य से गुरुवार को गोमती नगर स्थित पीएचडी हाउस में दो दिवसीय वेंडर विकास कार्यक्रम-2026 का शुभारंभ हुआ। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर और पीएचडीसीसीआई, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में एमएसई उद्यमियों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की खरीद प्रक्रिया, सरकारी ई-मार्केटप्लेस, गुणवत्ता, तकनीकी मानकों, वेंडर पंजीकरण और बाजार के अवसरों की जानकारी दी गई।

सरकारी खरीद में एमएसई के लिए 25 फीसदी लक्ष्य
एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर के निदेशक वी.के. वर्मा ने उद्घाटन एवं स्वागत संबोधन में कहा कि सरकारी खरीद में एमएसई की भागीदारी बढ़ाने के लिए 25 प्रतिशत खरीद का लक्ष्य निर्धारित है। उन्होंने बताया कि विभिन्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम एमएसई से खरीद कर रहे हैं, जिससे छोटे उद्यमों के लिए बड़े कारोबारी अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एससी, एसटी और महिला उद्यमियों के लिए भी सरकारी खरीद में विशेष प्रावधान किए गए हैं। एमएसई को अलग-अलग संस्थानों की वेंडर पंजीकरण और खरीद प्रक्रिया को समझकर इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।
यूपी के औद्योगिक तंत्र में एमएसएमई की अहम भूमिका
मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव, एमएसएमई एवं निर्यात प्रोत्साहन प्रांजल यादव ने कहा कि प्रदेश के औद्योगिक तंत्र में एमएसएमई की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि राज्य में हर 100 उद्योगों में 98 से अधिक एमएसएमई हैं और करीब 90 प्रतिशत इकाइयां सूक्ष्म उद्यम हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का निर्यात करीब 2 लाख करोड़ रुपये है। इसमें नोएडा का योगदान करीब 98 हजार करोड़ रुपये और गाजियाबाद का करीब 18 हजार करोड़ रुपये है। कानपुर, मुरादाबाद, भदोही, उन्नाव, बरेली, आगरा और वाराणसी जैसे औद्योगिक केंद्र भी प्रदेश के निर्यात तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
GeM पर एमएसई की हिस्सेदारी करीब 45 फीसदी
प्रांजल यादव ने कहा कि वेंडर विकास और सरकारी खरीद एमएसएमई के लिए बड़े अवसर उपलब्ध कराते हैं। उनके मुताबिक सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर एमएसई की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है, जिसकी राशि लगभग 9 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि ऑर्डर मिलने और चालान जारी होने के बाद एमएसई ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम के माध्यम से अपने बकाया भुगतान के आधार पर वित्त प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने एमएसई को भुगतान में देरी की समस्या कम करने के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एमएसई को 90 दिनों के भीतर भुगतान से जुड़े प्रावधानों की जानकारी रखनी चाहिए और सरकारी खरीद से संबंधित ऑनलाइन मंचों पर उपलब्ध अवसरों का नियमित रूप से लाभ उठाना चाहिए।
उद्यमियों को बदलती नीतियों की जानकारी रखने की सलाह
पीएचडीसीसीआई के उत्तर प्रदेश स्टेट चैप्टर के सह-अध्यक्ष एवं टेक्निकल करम ग्रुप के अध्यक्ष राजेश निगम ने कहा कि यह कार्यक्रम एमएसएमई को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के साथ सीधे संवाद करने और उपलब्ध कारोबारी अवसरों को समझने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को सरकारी नीतियों, नियमों और खरीद प्रक्रियाओं में होने वाले बदलावों की जानकारी लगातार लेते रहना चाहिए।
GeM पर करीब 20 लाख करोड़ की खरीद
GeM के उत्तर प्रदेश स्टेट नोडल एवं उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी कृष्ण मुरारी ने कहा कि वर्ष 2017 में शुरुआत के बाद से सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर करीब 20 लाख करोड़ रुपये की खरीद हो चुकी है। इसमें एमएसई की हिस्सेदारी लगभग 45 प्रतिशत यानी करीब 9 लाख करोड़ रुपये है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से करीब एक लाख करोड़ रुपये की खरीद की गई है। पोर्टल पर करीब 55 प्रतिशत विक्रेता ऑनबोर्ड हैं और लगभग 25 हजार नए वेंडर पंजीकृत हुए हैं।
रेलवे में एमएसई के लिए बड़े अवसर
आरडीएसओ के कार्यकारी निदेशक, स्टोर्स अकमल वदूद ने कहा कि लखनऊ और आसपास का भारतीय रेलवे तंत्र एमएसई के लिए व्यापक कारोबारी अवसर उपलब्ध कराता है। उन्होंने बताया कि मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली में करीब 7 से 8 हजार करोड़ रुपये की खरीद होती है। रेलवे के अलग-अलग जोन अपनी जरूरतों के अनुसार नियमित रूप से निविदाएं जारी करते हैं।
उन्होंने कहा कि आरडीएसओ रेलवे सामग्री के डिजाइन, विनिर्देश तैयार करने और वेंडर अनुमोदन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मशीनरी और प्लांट उपकरण ऐसा क्षेत्र है, जहां देश अभी भी सीमित वास्तविक स्रोतों पर निर्भर है। ऐसे में एमएसई इस क्षेत्र में विनिर्माण के अवसर तलाश सकते हैं।
ALIMCO ने एमएसई को जरूरत के अनुसार क्षमता विकसित करने को कहा
ALIMCO कानपुर के डीजीएम आलोक ठाकुर ने बताया कि संस्था के देशभर में छह विनिर्माण संयंत्र हैं। यह सरकारी योजनाओं, सीएसआर, सरकारी और खुदरा माध्यमों के जरिए दिव्यांगजनों की जरूरतें पूरी करती है। कानपुर स्थित संयंत्र करीब 45 एकड़ में फैला है और ALIMCO का सबसे बड़ा संयंत्र है। यह लगभग 50 से 60 प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं के साथ काम करता है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की जरूरतों का आकलन विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम करती है और उसी के आधार पर उत्पाद विकसित किए जाते हैं। एमएसई को ALIMCO की आवश्यकताओं को समझकर अपनी क्षमताएं उसके अनुरूप विकसित करनी चाहिए। महिला और एससी-एसटी उद्यमियों के लिए भी खरीद प्रक्रिया में अवसर उपलब्ध हैं।
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पावर ग्रिड में एमएसई से 70 फीसदी तक खरीद
पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के उत्तरी क्षेत्र-3 के वरिष्ठ महाप्रबंधक गिरिश गुप्ता ने बताया कि एमएसई के लिए ट्रांसमिशन ट्रांसफॉर्मर, रिएक्टर, इंसुलेटर और छोटे उपकरणों के साथ मैनपावर, बागवानी, गेस्ट हाउस, फिटिंग और रखरखाव सेवाओं में भी अवसर हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने एमएसई से न्यूनतम 25 प्रतिशत खरीद का लक्ष्य तय किया है, जबकि पावर ग्रिड के उत्तरी क्षेत्र में करीब 70 प्रतिशत खरीद एमएसई से की जा रही है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में एमएसई से 250 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद हुई है।
HAL में आउटसोर्सिंग बढ़ी, गुणवत्ता और समय पर आपूर्ति पर जोर
HAL लखनऊ के आउटसोर्सिंग विभाग के डीजीएम प्रमोद बरनवाल ने कहा कि लखनऊ में HAL की आउटसोर्सिंग में करीब 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि सक्षम एमएसई के लिए गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति सबसे महत्वपूर्ण हैं। सेना और नौसेना की आवश्यकताओं के लिए करीब 2.5 लाख ऑर्डर संभाले जा रहे हैं, ऐसे में उत्पादन और आपूर्ति समय पर होना जरूरी है।
तकनीकी सत्र में सरकारी खरीद और गुणवत्ता पर चर्चा
उद्घाटन सत्र के बाद कार्यक्रम में तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसमें HAL, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, ALIMCO, आरडीएसओ और गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने एमएसई के लिए उपलब्ध कारोबारी अवसरों और वेंडर पंजीकरण प्रक्रिया की जानकारी दी।
पावर ग्रिड की उत्तरी क्षेत्र की अनामिका झा, ALIMCO कानपुर के डीजीएम रवि रंजन, आरडीएसओ लखनऊ के निदेशक राकेश गुप्ता और एनटीपीसी के डीजीएम अमित बेहेरा ने अपने संस्थानों में एमएसई के लिए उपलब्ध कारोबारी अवसरों और खरीद संबंधी आवश्यकताओं की जानकारी साझा की।
गुणवत्ता और मानकीकरण को बताया जरूरी
GeM सेल, उत्तर प्रदेश के अमन सिंह ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर वेंडर पंजीकरण और सरकारी खरीद प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। भारतीय मानक ब्यूरो के जितेन्द्र कुमार ने विपणन, तकनीक और गुणवत्ता विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया और उत्पादों में गुणवत्ता एवं मानकीकरण के महत्व को रेखांकित किया।
भारतीय पैकेजिंग संस्थान, लखनऊ के प्रो. अंशुमान श्रीवास्तव ने कहा कि बेहतर पैकेजिंग केवल उत्पाद की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी पहचान, प्रस्तुति और बाजार में स्वीकार्यता पर भी असर डालती है। आधुनिक और मानक अनुरूप पैकेजिंग से एमएसई के उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है।
पीएसयू और एमएसई के बीच हुआ सीधा संवाद
कार्यक्रम के पहले दिन के अंतिम सत्र में बी2बी बैठक और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा एमएसई के बीच संवाद आयोजित किया गया। इसमें पीएसयू प्रतिनिधियों और एमएसई उद्यमियों ने खरीद आवश्यकताओं, तकनीकी मानकों, वेंडर पंजीकरण और संभावित कारोबारी सहयोग पर सीधे बातचीत की। सत्र का समन्वय एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर और पीएचडीसीसीआई, लखनऊ ने किया।
200 से अधिक प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में लखनऊ के विभिन्न औद्योगिक संगठनों के 200 से अधिक पदाधिकारी और प्रतिनिधि, एमएसएमई इकाइयों के उद्यमी तथा विभिन्न सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में एसोचैम, डीआईसीसीआई और अन्य औद्योगिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी भी शामिल हुए।
20 से अधिक स्टॉल में उत्पादों और तकनीकों का प्रदर्शन
कार्यक्रम में 20 से अधिक स्टॉल लगाए गए। इनमें एमएसएमई और प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने अपने उत्पादों, सेवाओं, तकनीकों और उपलब्धियों का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के पहले दिन के समापन पर एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर के सहायक निदेशक नीरज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

