Sunday, August 30, 2026
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एम्स रायबरेली में वायरल हेपेटाइटिस पर सीएमई का आयोजन, विशेषज्ञों ने रोकथाम, निदान और उपचार की नई जानकारियां साझा कीं

रायबरेली: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली के सूक्ष्मजीवविज्ञान विभाग ने सामुदायिक चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य विभाग के सहयोग से वायरल हेपेटाइटिस विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को हेपेटाइटिस बी और सी की रोकथाम, निदान तथा उपचार से जुड़ी नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराना था।

कार्यक्रम की शुरुआत सूक्ष्मजीवविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शेफाली गुप्ता के स्वागत उद्बोधन से हुई। इसके बाद एम्स रायबरेली की कार्यकारी निदेशक डॉ. अमिता जैन ने कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने निरंतर चिकित्सा शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वायरल हेपेटाइटिस के उन्मूलन के लिए प्रभावी रोकथाम रणनीतियों को व्यापक स्तर पर अपनाना जरूरी है।

राष्ट्रीय कार्यक्रम की प्रगति और चुनौतियों पर हुई चर्चा

वैज्ञानिक सत्रों के दौरान डॉ. अमिता जैन ने राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) की प्रगति और चुनौतियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया। वहीं नीडल-स्टिक इंजरी से प्रभावित एक स्वास्थ्यकर्मी ने अपने अनुभव साझा किए, जिससे व्यावसायिक सुरक्षा और समय पर पोस्ट-एक्सपोज़र प्रबंधन के महत्व को रेखांकित किया गया।

विशेषज्ञों ने साझा की नवीनतम चिकित्सीय जानकारी

कार्यक्रम में एम्स रायबरेली की डीन (अकादमिक) डॉ. नीरज कुमारी और अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। दोनों ने स्वास्थ्यकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे सीएमई कार्यक्रम चिकित्सा क्षेत्र में ज्ञानवर्धन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और वायरल हेपेटाइटिस की रोकथाम, समय पर पहचान, प्रभावी उपचार तथा संक्रमण नियंत्रण में स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अत्यंत अहम है।

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हेपेटाइटिस के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने दिए व्याख्यान

कार्यक्रम के दौरान डॉ. सौरभ पॉल ने रक्तजनित हेपेटाइटिस के महामारी विज्ञान और रोग भार पर प्रकाश डाला। डॉ. स्वेता सिंह ने हेपेटाइटिस बी और सी के प्रयोगशाला निदान की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी, जबकि डॉ. निधि भटनागर ने निदान के क्षेत्र में नवीनतम प्रगतियों पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। डॉ. मनु शर्मा ने हेपेटाइटिस बी और सी की रोगजनन तथा उपचार पर विस्तार से चर्चा की। वहीं डॉ. मुकेश शुक्ला ने पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस और संक्रमण की रोकथाम से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम का समापन डॉ. स्वेता सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्वास्थ्यकर्मियों और प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में भाग लेकर वायरल हेपेटाइटिस से जुड़ी अद्यतन चिकित्सीय जानकारियां प्राप्त कीं।

 

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