तहसीलदार न्यायालय से फाइल लेकर भागे वादकारी: पेशकार को पेट्रोल डालकर जलाने की धमकी का आरोप, 2 वकीलों समेत 4 पर FIR

गोंडा जिले के तहसीलदार न्यायालय सदर में सरकारी कार्य में बाधा डालने, न्यायालय की पत्रावली लेकर भागने और पेशकार को जान से मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। सदर तहसीलदार के पेशकार ज्ञानचंद्र की तहरीर पर दो अधिवक्ताओं और उनके दो अज्ञात सहयोगियों समेत चार लोगों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है।

पेशकार ज्ञानचंद्र ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि घटना 17 जुलाई 2026 की है। वह तहसीलदार न्यायालय सदर में अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। इसी दौरान अधिवक्ता सचिन मिश्रा और अधिवक्ता राजेश तिवारी अपने दो अन्य सहयोगियों के साथ न्यायालय कक्ष में पहुंचे।
आरोप है कि उन्होंने न्यायालय में विचाराधीन वाद संख्या T202308300414422, धारा-34 एलआर एक्ट, अजय बनाम राधा, ग्राम तारी परसोहिया से संबंधित निर्णीत पत्रावली देखने के लिए मांगी। ज्ञानचंद्र ने बताया कि पत्रावली उस समय तहसीलदार सदर के पास सुरक्षित थी। तहसीलदार को फोन पर जानकारी देने के बाद उनके आवास से पत्रावली केवल मुआयना करने के लिए उपलब्ध कराई गई।
आरोप है कि पत्रावली हाथ में आने के बाद दोनों अधिवक्ताओं ने उसमें पारित आदेश पढ़ा और अपने साथ आए वादकारी को फाइल सौंपते हुए उसे लेकर भागने के लिए कहा। जब पेशकार ज्ञानचंद्र ने पत्रावली वापस लेने के लिए पीछा किया तो चारों लोग उग्र हो गए।

ज्ञानचंद्र ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके खिलाफ सार्वजनिक रूप से जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अपमानित किया गया और गाली-गलौज की गई। साथ ही उन्हें और तहसीलदार न्यायालय को पेट्रोल डालकर फूंक देने की धमकी दी गई।
आरोप है कि इसके बाद आरोपी यह कहते हुए पत्रावली लेकर मौके से चले गए कि वे इसे वापस नहीं करेंगे। घटना के बाद तहसील परिसर में हड़कंप मच गया। पेशकार ने नगर कोतवाली पुलिस को लिखित तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की।
नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि तहरीर के आधार पर दो अधिवक्ताओं समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। नगर कोतवाली पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी
