Top Newsउत्तर प्रदेशराज्य

रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय एवं भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के बीच ऐतिहासिक एमओयू : कृषि अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

बरेली, 15 जुलाई। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय (एमजेपीआरयू), बरेली ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आईआईपीआर), कानपुर के साथ एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता दोनों प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच विद्यार्थियों के प्रशिक्षण, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी अनुसंधान तथा संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान को नई गति प्रदान करेगा।
इस महत्वपूर्ण एमओयू पर आईसीएआर–भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के निदेशक डॉ. जी. पी. दीक्षित तथा महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के कुलसचिव श्री महेंद्र कुमार ने हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर प्रो. उपेंद्र कुमार, डीन, कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय एवं अतिरिक्त निदेशक (अंतरराष्ट्रीय संबंध), ने साक्षी के रूप में हस्ताक्षर करते हुए बताया कि यह समझौता विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए राष्ट्रीय स्तर की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने कहा कि इस सहयोग के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, वैज्ञानिकों एवं विद्यार्थियों का आदान-प्रदान, प्रयोगशालाओं का साझा उपयोग, प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, सेमिनार तथा तकनीकी क्षमता विकास जैसे अनेक कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि एमओयू के अंतर्गत दलहन फसलों के उन्नत अनुसंधान, पौध प्रजनन, जैव प्रौद्योगिकी, जीनोमिक्स, जैव सूचना विज्ञान, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन अनुकूल कृषि तथा आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेष रूप से कार्य किया जाएगा।
इससे विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को देश के अग्रणी कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ कार्य करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान का अवसर प्राप्त होगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। इस साझेदारी से न केवल विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, दलहन उत्पादन में सुधार, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी।
एमओयू के दौरान आईआईपीआर, कानपुर की ओर से डॉ. सुजीत कुमार (प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, मानव संसाधन विकास) तथा डॉ. सी. पी. नाथ (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सदस्य सचिव, मानव संसाधन विकास) साक्षी रहे। वहीं विश्वविद्यालय की ओर से प्रो. उपेंद्र कुमार, डीन, कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संकाय तथा डॉ. नीरज कुमार, सहायक प्रोफेसर, शिक्षा विभाग, साक्षी के रूप में उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर केपी सिंह जी ने इस समझौते को कृषि एवं दलहन अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्ध बताते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालय राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थानों के साथ अपने सहयोग को और अधिक सशक्त करेगा

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की

---------------------------------------------------------------------------------------------------