HPV टीकाकरण अभियान पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा- क्या आप इसे पटरी से उतारना चाहते हैं?
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को किशोरियों में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए देशभर में चल रहे मानव पैपिलोमावायरस (एचपीवी) टीकाकरण अभियान से जुड़ी जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि टीकाकरण के दौरान किसी मामले में गलती होने पर मुआवजे के सामान्य नियम लागू होंगे।
पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या वह अपनी याचिका वापस लेना चाहते हैं और क्या अदालत से इस मामले में कोई टिप्पणी करवाना चाहते हैं। सुनवाई के दौरान पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि उसे कड़ी टिप्पणी करने के लिए मजबूर न किया जाए। अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता डॉक्टर हैं तो मामला और भी गंभीर है, क्योंकि यह लाखों बेटियों के स्वास्थ्य से जुड़ा सवाल है। पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या याचिकाकर्ता इस अभियान को पटरी से उतारना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जनहित याचिका किसी छिपे हुए उद्देश्य के साथ दायर की गई प्रतीत होती है और याचिकाकर्ता की मंशा सद्भावनापूर्ण नहीं लगती।
याचिकाकर्ता ने कहा- टीकाकरण के खिलाफ नहीं हैं
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति एचपीवी टीके को लेकर नहीं, बल्कि अभियान के क्रियान्वयन और टीकाकरण के बाद सामने आने वाली प्रतिकूल घटनाओं से निपटने की व्यवस्था को लेकर है।
वकील ने कहा कि टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी के लिए उचित तंत्र होना चाहिए। साथ ही, ऐसी स्थिति में प्रभावित लोगों के लिए मुआवजे की व्यवस्था भी तय होनी चाहिए।
सुनवाई से इनकार के बाद याचिका वापस ली
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किए जाने के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने इसे वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी। यह जनहित याचिका यूनिवर्सल हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की ओर से दायर की गई थी।
याचिका में सरकार समर्थित एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम को लागू करने के तरीके को चुनौती दी गई थी। इसमें दावा किया गया था कि कार्यक्रम सूचित सहमति, शारीरिक स्वायत्तता, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन करता है।
28 फरवरी को अजमेर से शुरू हुआ था अभियान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 फरवरी को राजस्थान के अजमेर से 14 वर्ष की लड़कियों के लिए देशव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी। अभियान में एक खुराक वाले गार्डासिल-4 टीके का इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह टीका एचपीवी के टाइप 16 और 18 से सुरक्षा प्रदान करता है, जिन्हें सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार वायरस माना जाता है। इसके अलावा यह एचपीवी के टाइप 6 और 11 से भी सुरक्षा देता है।

