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होर्मुज में फिर निशाने पर भारतीय क्रू वाला जहाज! ड्रोन हमले से मचा हड़कंप, लगातार हमलों से बढ़ी भारत की चिंता

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरा गई है। क्षेत्र में शांति समझौते की चर्चाओं के बावजूद हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। ताजा घटना में भारतीय चालक दल वाले एक तेल एवं रसायन टैंकर पर ड्रोन हमला किया गया, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा, हालांकि सभी भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब भारत पहले ही होर्मुज क्षेत्र में भारतीय नाविकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं पर कड़ा विरोध दर्ज करा चुका है।

भारतीय क्रू वाले टैंकर पर ड्रोन हमला

जानकारी के अनुसार, 12 और 13 जून 2026 की दरमियानी रात हांगकांग के झंडे वाले तेल और रसायन टैंकर ‘बोकेम मरेंगो’ पर ड्रोन से हमला किया गया। जहाज पूरी तरह भारतीय नाविकों द्वारा संचालित था।

टैंकर का संचालन एंग्लो-ईस्टर्न शिप मैनेजमेंट (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड कर रही थी। घटना के वक्त जहाज होर्मुज क्षेत्र से गुजर रहा था और अमेरिकी एनसीएजीएस सुरक्षा व्यवस्था के तहत निगरानी में अपनी यात्रा पूरी कर रहा था।

इसके बावजूद एक मानवरहित ड्रोन ने जहाज को निशाना बनाया, जिससे समुद्री सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

जहाज को हुआ नुकसान, लेकिन बची बड़ी त्रासदी

हमले में जहाज के तीन हिस्से प्रभावित हुए। नंबर-1 और नंबर-2 पोर्ट वाटर बैलास्ट टैंक क्षतिग्रस्त हो गए। इसके अलावा नंबर-2 पोर्ट कार्गो टैंक को भी नुकसान पहुंचा।

ये टैंक जहाज के संतुलन और माल भंडारण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हालांकि नुकसान के बावजूद जहाज डूबा नहीं और सुरक्षित तरीके से अपनी यात्रा जारी रखने में सफल रहा।

सभी भारतीय नाविक सुरक्षित

घटना के बाद सबसे राहत की बात यह रही कि जहाज पर सवार सभी भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी भी क्रू सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं है।

हमले के तुरंत बाद आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम सक्रिय की गई और हालात पर लगातार निगरानी रखी गई। जहाज मालिकों ने संबंधित नौसैनिक एजेंसियों और समुद्री सुरक्षा संस्था यूकेएमटीओ को भी घटना की जानकारी दी।

फुजैराह पहुंचा जहाज, शुरू होगी मरम्मत

हमले के बाद जहाज धीरे-धीरे संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह की ओर बढ़ा और वहां सुरक्षित पहुंच गया। फुजैराह क्षेत्र समुद्री जहाजों की मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

शिपिंग कंपनी ने जहाज की तकनीकी जांच और मरम्मत के लिए विशेषज्ञों की टीम तैनात कर दी है, जो नुकसान का आकलन करेगी।

पहले भी भारतीय नाविकों वाले जहाज पर हुआ था हमला

होर्मुज क्षेत्र में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले एमटी सेटेबेल्लो नामक व्यापारी जहाज पर भी हमला हुआ था। यह जहाज पलाउ के झंडे तले संचालित हो रहा था और उसमें 24 भारतीय नाविक सवार थे।

उस हमले में 21 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया था, लेकिन तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।

भारत ने अमेरिका के सामने जताई थी आपत्ति

भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर हमलों को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत कर चिंता जताई थी। भारत ने स्पष्ट कहा था कि सामान्य व्यापारिक जहाजों पर इस तरह के हमले स्वीकार्य नहीं हैं।

विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत को तलब कर विरोध भी दर्ज कराया था। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऐसे हमले तत्काल बंद होने चाहिए।

तनाव के बीच बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। इस क्षेत्र में जारी तनाव का असर न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार बल्कि भारतीय नाविकों और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। लगातार हो रही घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं और भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है।

 

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