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3 महीने बाद होर्मुज से निकला भारतीय LNG जहाज ‘दिशा’, 34 और जहाजों को मिल सकती है मंजूरी; तेल-गैस आपूर्ति पर बड़ी राहत की उम्मीद

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच समझौता तय होने के बाद भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वज वाला एलएनजी जहाज ‘दिशा’ तीन महीने से अधिक समय बाद युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला पहला भारतीय जहाज बन गया है। 62,370 टन एलएनजी लेकर भारत की ओर बढ़ रहा यह पोत 18 जून को दहेज बंदरगाह पहुंच सकता है। जहाज के सुरक्षित निकलने के बाद फारस की खाड़ी में फंसे 34 अन्य जहाजों को भी जल्द अनुमति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शेष जहाजों को भी हरी झंडी मिल जाती है तो भारत के लिए तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति में सुधार आएगा। इससे ईंधन और गैस की उपलब्धता को लेकर बनी चिंताओं में भी कमी आ सकती है।

राहत मिलेगी, लेकिन सामान्य होने में लगेगा समय

रिपोर्ट के मुताबिक फारस की खाड़ी में फंसे कम से कम 16 जहाज उर्वरक लेकर खड़े हैं। जानकारों का कहना है कि तेल और गैस क्षेत्र में पूरी तरह राहत मिलने में अभी कुछ समय लग सकता है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के दौरान कई ऊर्जा संयंत्रों का प्रभावित होना है।

बताया जा रहा है कि कतर के रास लफ्फान ऊर्जा केंद्र को पूरी क्षमता से संचालन शुरू करने में समय लगेगा। भारत का रास लफ्फान के साथ दीर्घकालिक गैस आपूर्ति समझौता है और देश बड़ी मात्रा में एलएनजी का आयात यहीं से करता है।

यूएई का हबशान गैस प्लांट भी प्रभावित

संयुक्त अरब अमीरात का हबशान गैस प्लांट भी संघर्ष के असर से प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार संयंत्र फिलहाल लगभग 60 प्रतिशत क्षमता के साथ काम कर रहा है, जबकि शेष क्षमता बहाल होने में अभी समय लगेगा। अनुमान है कि 2027 की शुरुआत तक यह संयंत्र 80 प्रतिशत क्षमता तक पहुंच जाएगा।

संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक 10 भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। युद्ध से पहले भारत अपने कुल तेल आयात का करीब 88 प्रतिशत विदेशों से करता था, जबकि देश के कुल एलएनजी आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर आता था।

62 हजार टन एलएनजी लेकर भारत आ रहा है ‘दिशा’

भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड की अगुवाई वाले समूह द्वारा प्रबंधित एलएनजी पोत ‘दिशा’ 62,370 टन एलएनजी लेकर सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है। अमेरिका-ईरान के बीच प्रारंभिक युद्धविराम समझौते के बाद यह उन शुरुआती वाणिज्यिक जहाजों में शामिल है जिन्होंने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से सफलतापूर्वक आवाजाही की है।

पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि एलएनजी पोत ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है और इसके 18 जून को भारत के दहेज बंदरगाह पहुंचने की संभावना है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर लगातार नजर

मंत्रालय के अनुसार नौवहन महानिदेशालय भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, पोत परिवहन कंपनियों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।

कतर से मालढुलाई के लिए पेट्रोनेट एलएनजी द्वारा चार्टर पर लिया गया जहाज ‘दिशा’ पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान जलडमरूमध्य क्षेत्र में फंस गया था। अब यह दोबारा अपनी यात्रा शुरू कर भारत की ओर बढ़ रहा है।

खाड़ी क्षेत्र में 18 हजार भारतीय नाविक तैनात

ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि व्यापक खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान में करीब 18,000 भारतीय नाविक कार्यरत हैं। नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए 24 घंटे हेल्पलाइन सेवा संचालित की जा रही है। अब तक 3,500 से अधिक भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश भी लाया जा चुका है।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी क्षेत्र में संचालित भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर करीब 325 भारतीय नाविक तैनात हैं, जबकि इस क्षेत्र में फिलहाल 13 भारतीय जहाज मौजूद हैं।

 

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