योगासन में भारत का डंका: प्रवीण पाठक ने विश्व चैंपियनशिप में जीता स्वर्ण। रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के शोध छात्र ने रचा इतिहास

बरेली, 13 जून। प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप 2026 में भारत ने एक और गौरवशाली उपलब्धि हासिल की है। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के पीएच.डी. शोध छात्र श्री प्रवीण कुमार पाठक ने कलात्मक योगासन – सीनियर पुरुष वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया है।

यह ऐतिहासिक प्रतियोगिता 4 से 8 जून 2026 तक अहमदाबाद, गुजरात के ट्रांसस्टेडिया स्टेडियम में आयोजित हुई, जिसमें अमेरिका, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, अर्जेंटीना, दक्षिण अफ्रीका, केन्या, नाइजीरिया, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, बांग्लादेश, थाईलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया सहित 75 से अधिक देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया।
प्रवीण कुमार पाठक पिछले वर्ष के एशियन चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता भी हैं। उन्होंने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय निर्णायकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वे B.Sc. फिजिकल एजुकेशन तथा M.Sc. योग साइंस कर चुके हैं और वर्तमान में महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली में शोध कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर के.पी. सिंह ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि “प्रवीण कुमार पाठक की यह जीत केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष का नतीजा नहीं है, बल्कि यह हमारे विश्वविद्यालय की योग एवं खेल संस्कृति का प्रतीक है। हम गर्व से कह सकते हैं कि महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय ने योग के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं। विश्वविद्यालय परिसर में निर्मित ‘योग वाटिका’ इसी दिशा में एक अद्भुत प्रयास है। प्रवीण की सफलता हमारे सभी शोधार्थियों और छात्रों के लिए प्रेरणा है। मैं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।”
अपनी जीत के बाद प्रवीण ने कहा,
“यह पदक मेरे देश का है। मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभारी हूँ, जिनके विजन से योग को वैश्विक पहचान मिली। योग गुरु स्वामी रामदेव जी और सभी पूज्य संतों को नमन, जिन्होंने योग को जन-जन तक पहुँचाया। मैं कुलपति प्रोफेसर के.पी. सिंह जी का विशेष रूप से आभारी हूँ, जिन्होंने विश्वविद्यालय में योग वाटिका जैसे अद्भुत प्रयासों से योग को बढ़ावा दिया। ।”
प्रवीण का सपना है कि वह प्रोफेसर और चैंपियन दोनों बनें। उनका मानना है – “एक खिलाड़ी के मन में कुछ भी बनने की ताकत होती है।”
विश्वविद्यालय परिवार ने प्रवीण को राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बताते हुए भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
