एसआरएमएस रिद्धिमा में कवि सम्मेलन ‘साहित्य सरिता’ का आयोजन



बरेली,17 जुलाई। एसआरएमएस रिद्धिमा में कल शाम कवि सम्मेलन ‘साहित्य सरिता’ का आयोजन हुआ। इसमें अभिषेक अनंत (बदायूं ), आकांक्षा गुप्ता (हरदोई), पीके दीवाना (बरेली), विकास आर्य (पूरनपुर), हिमांशु श्रोतिया (बरेली) और उमेश त्रिगुणायत (बरेली) ने अपने कविता पाठ से श्रोताओं को आनंदित किया।
कवयित्री आकांक्षा गुप्ता ने वाणी वंदना से कवि सम्मेलन का आरंभ किया। उन्होंने ‘प्रेम ग्रंथों में कथाओं में पढ़ा, वेद मंत्रों में ऋचाओं में पढ़ा, लोक हित में कभी खुली थीं जो, तुमको उन शिव की जटाओं में पढ़ा’ सुनाकर सनातन धर्म को विशेषता सामने रखी। गीतकार विकास आर्य स्वप्न ने ‘मेहनत करता रहता है ज्यादा आराम नहीं मिलता, मेहनत पूरी होती है और पूरा दाम नहीं मिलता। जिसके घर का चूल्हा बस मजदूरी से जलता हो, उस दिन क्या होता है जिस दिन काम नहीं मिलता’ सुनाकर श्रोताओं को झकझोर दिया। हास्य-व्यंग्य कवि पीके ‘दीवाना’ ने पति की ओर सज ‘पत्नी चाहे तो पारिवारिक विषम परिस्थितियों में भी अपने को ढाल सकती है, और यदि अपने पे आ जाये तो किसी तरह से भी भड़ास निकाल सकती है’ सुनाकर श्रोताओं को खूब हंसाया। उन्होंने पत्नी की तरफ से पति के लिए चंद लाइनें सुनाईं। कहा- पत्नी बोली-“पति है या दल बदलू नेता? कम से कम बच्चों का ही ख्याल कर लेता, तू तो जाता है, चला आता है। तुझे क्या मालूम, तेरे जाने के बाद, पड़ोसी मुझे किस तरह से निहारता है, मौका मिलते ही आंख भी मारता है। हमने कहा-“क्या कहती हो? आंख मारने तक उसे क्यों देखती रहती हो?” सुनाकर लोटपोट कर दिया। अभिषेक अनंत ने ‘मैं गया हार तुम जीत बन कर रहीं, जिंदगी भर अमर प्रीत बन कर रहीं, गुनगुनाता रहा मैं सफर भर तुम्हें, तुम हृदय में मेरे गीत बन कर रहीं’ सुनाकर प्रेम की दुनिया में पहुंचाया। उमेश त्रिगुणायत ‘अद्भुत’ ने ‘मजहबों के नाम पर बांटा हुआ हूं दोस्तों, इस जहां में बेसबब डांटा हुआ हूं दोस्तों, देशहित में दान कर दीं खून, चर्बी, हड्डियां, इसलिए मैं सूखकर कांटा हूं दोस्तों, सुनाया। हिमांशु श्रोत्रिय “निष्पक्ष” ने ‘अधुनातन हो गए लोग जब, जड़े स्वयं की काट रहे हों खंड-खंड हो चुके देश के, खंडन की तक बाट रहे हों। फिर कैसे सम्भव है कह दें, विजय हमारी ही बस होगी। ‘मृत्युंजय’ को छोड़ पुरोहित, कर ‘मारण’ ‘उच्चाट’ रहे हों’ सुनाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। कार्यक्रम में डॉ. प्रभाकर गुप्ता, डॉ. अनुज गुप्ता, डॉ. शैलेश सक्सेना, साहित्य सरिता के समन्वयक अश्वनी कुमार चौहान उपस्थित रहे। कवि उमेश त्रिगुणायत ‘अद्भुत’ ने मंच का संचालन किया। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
