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नई सरकार, पुराने समीकरण: कर्नाटक कैबिनेट में सिद्धारमैया खेमे की मजबूत पकड़, डीके शिवकुमार के नेतृत्व में सत्ता संतुलन की नई राजनीति

नई दिल्ली: कर्नाटक की राजनीति में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार नेतृत्व परिवर्तन के साथ डीके शिवकुमार ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में पदभार संभाल लिया है। कांग्रेस ने इस बदलाव के साथ सत्ता का नया अध्याय शुरू किया है, लेकिन कैबिनेट गठन और जिम्मेदारियों के बंटवारे ने एक बार फिर पुराने राजनीतिक समीकरणों को सामने ला दिया है। नई सरकार में भले ही नेतृत्व शिवकुमार के हाथ में है, लेकिन मंत्रिमंडल में सिद्धारमैया समर्थकों की मजबूत मौजूदगी चर्चा का केंद्र बनी हुई है।

कैबिनेट गठन में संतुलन साधने की कोशिश

शपथ ग्रहण के बाद आयोजित पहली कैबिनेट बैठक में सरकार ने विकास, रोजगार और आधारभूत संरचना को प्राथमिकता देने का संकेत दिया। डीके शिवकुमार ने इसे ‘युवा युग’ की शुरुआत बताते हुए कई नई योजनाओं की घोषणा की। सरकार ने छात्रों के लिए मुफ्त बस पास, रोजगार बढ़ाने के लिए विशेष पोर्टल और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए वार्षिक कैलेंडर जैसी योजनाओं को मंजूरी दी है।

युवाओं और विकास पर फोकस, बड़े फैसलों की शुरुआत

नई सरकार ने युवाओं को केंद्र में रखते हुए राज्यभर में युवा क्लब स्थापित करने की योजना भी घोषित की है। इसके साथ ही सड़क निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। कुछ क्षेत्रों में भवन निर्माण नियमों में राहत देने का फैसला भी लिया गया है, जिससे विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

मंत्रिमंडल में सिद्धारमैया खेमे का प्रभाव बरकरार

मंत्रिमंडल के गठन में राजनीतिक संतुलन साफ दिखाई देता है। उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता जी. परमेश्वर को सौंपी गई है। वहीं कई महत्वपूर्ण विभागों में ऐसे नेताओं को जगह मिली है जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद पार्टी ने पुराने शक्ति समीकरणों को पूरी तरह दरकिनार नहीं किया है।

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर भी जोर

कैबिनेट गठन में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और अन्य वर्गों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। हालांकि इस बार मंत्रिमंडल में किसी महिला नेता को जगह न मिलने पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आगामी विस्तार में इस पर बदलाव देखने को मिल सकता है।

मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना बनी हुई

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार राज्यसभा चुनावों के बाद कैबिनेट विस्तार संभव है, क्योंकि अभी कई पद खाली हैं। ऐसे में कांग्रेस को विभिन्न गुटों और क्षेत्रों के नेताओं को समायोजित करने का अवसर मिलेगा। फिलहाल सरकार ने अपने शुरुआती कदमों से विकास और प्रशासनिक सुधारों पर फोकस का संदेश देने की कोशिश की है।

शक्ति प्रदर्शन में दिखी कांग्रेस की एकजुटता

शपथ ग्रहण समारोह कांग्रेस के लिए एक बड़े शक्ति प्रदर्शन का अवसर भी बना, जिसमें पार्टी का शीर्ष नेतृत्व और कई राज्यों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन केवल नेतृत्व का बदलाव नहीं, बल्कि संगठन और सरकार के बीच नए समन्वय की शुरुआत है।

 

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