सिंहस्थ तैयारियों के बीच बड़ी राहत: 15 जून से श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर, ऑनलाइन बुकिंग भी शुरू
नई दिल्ली: सिंहस्थ कुंभ की तैयारियों के बीच शिवभक्तों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। महाराष्ट्र स्थित प्रसिद्ध भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर 15 जून 2026 से एक बार फिर श्रद्धालुओं के लिए दर्शन हेतु खोल दिया जाएगा। करीब पांच महीने से बंद चल रहे इस पवित्र मंदिर को फिर से खोलने की घोषणा के बाद देशभर के भक्तों में उत्साह का माहौल है।
पांच महीने बाद फिर खुलेगा मंदिर, विकास कार्य हुए पूरे

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर को जनवरी 2026 में अस्थायी रूप से बंद किया गया था। इसका उद्देश्य मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में चल रहे व्यापक विकास कार्यों को पूरा करना था। प्रशासन ने बताया कि यह सभी कार्य आगामी सिंहस्थ कुंभ को ध्यान में रखते हुए किए गए, ताकि बढ़ती भीड़ को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
सिंहस्थ को ध्यान में रखकर की गई विशेष तैयारियां
महाराष्ट्र में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। इसी को देखते हुए मंदिर परिसर में आधारभूत ढांचे को मजबूत किया गया है। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और यातायात सुविधा को बेहतर बनाने के लिए विशेष परियोजनाएं चलाई गईं, जो अब पूरी हो चुकी हैं।
श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं का दावा
पांच महीने के भीतर मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों का उन्नयन किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए प्रतीक्षा क्षेत्र, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं में भी सुधार किया गया है। प्रशासन का दावा है कि इन बदलावों से भक्तों को अधिक सुगम और सुरक्षित दर्शन अनुभव मिलेगा, खासकर बड़े आयोजनों और त्योहारों के दौरान भीड़ नियंत्रण आसान होगा।
5 जून से शुरू होगी ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था

मंदिर प्रशासन ने दर्शन को व्यवस्थित करने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 5 जून 2026 से श्रद्धालु निर्धारित पोर्टल पर जाकर दर्शन स्लॉट बुक कर सकेंगे। प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से भीड़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और भक्तों को लंबी कतारों से राहत मिलेगी।
आस्था और धार्मिक महत्व का प्रमुख केंद्र
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसका धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। घने जंगलों और सह्याद्रि पर्वतों के बीच स्थित यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य के कारण भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। हर वर्ष देशभर से लाखों भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
यात्रा व्यवस्था और प्रशासन की अपील
पुणे और कर्जत इस मंदिर के निकटतम रेलवे स्टेशन हैं, जहां से सड़क मार्ग के जरिए आसानी से मंदिर पहुंचा जा सकता है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा से पहले ऑनलाइन पंजीकरण अवश्य करें और निर्धारित नियमों का पालन करें, ताकि सभी भक्तों को सुरक्षित और सुचारु दर्शन का लाभ मिल सके।
