बीबीएयू में हिंदी दिवस पर संगोष्ठी, बोले कुलपति- हिंदी के बढ़ते प्रभाव से रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ रहे

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में हिंदी दिवस के अवसर पर ‘राष्ट्र के विकास में हिंदी की भूमिका’ विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित कार्यक्रम में हिंदी भाषा के महत्व, इसके वैश्विक विस्तार और राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर एमटीएस कर्मचारियों के लिए सुलेख प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।

हिंदी विकास और संवाद का सशक्त माध्यम: प्रो. राज कुमार मित्तल
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत के समग्र विकास के लिए आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, पर्यावरणीय और आध्यात्मिक क्षेत्रों में संतुलित एवं सतत विकास जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस विकास को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
प्रो. मित्तल ने कहा कि हिंदी आम लोगों को जोड़ने वाली भाषा है, जो देश की विविधता के बीच संवाद और समन्वय स्थापित करने का प्रभावी माध्यम बनती है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति की पहचान, संस्कृति और भावनात्मक जुड़ाव का आधार होती है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में हिंदी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। यह अब केवल साहित्य और संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवसाय, उद्यमिता और रोजगार के क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से भारतीय भाषाओं के अध्ययन और प्रयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।
हिंदी भारतीय संस्कृति और विविधता को जोड़ने वाली भाषा: प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित
मुख्य अतिथि हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग एवं राष्ट्रभाषा प्रचार समिति वर्धा के सभापति प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि विश्वभर में हजारों भाषाएं और बोलियां प्रचलित हैं, जिनमें हिंदी का विशेष स्थान है। उन्होंने बताया कि हिंदी के अंतर्गत 350 से अधिक बोलियां और भाषाई स्वरूप शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और विविधता को एक सूत्र में जोड़ने वाली भाषा है। हिंदी साहित्य ने हमेशा समाज को दिशा देने, मानवीय मूल्यों को स्थापित करने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रो. दीक्षित ने कहा कि हिंदी के व्यापक प्रयोग से राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को मजबूती मिलती है। उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार और इसके साहित्यिक व सांस्कृतिक स्वरूप को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।
सरल भाषा से आमजन तक पहुंचता है विकास का संदेश: संजीव जायसवाल
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वरिष्ठ साहित्यकार और मुख्य वक्ता संजीव जायसवाल ने कहा कि देश का समावेशी विकास तभी संभव है, जब योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि आम लोगों तक सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी पहुंचाने में भाषा की भूमिका सबसे अहम होती है।
उन्होंने कहा कि हिंदी आज देश की सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा की प्रभावशीलता उसकी सरलता, शुद्धता और सहजता में होती है। इसलिए दैनिक कार्यों में सरल और सहज हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
हिंदी दिवस पर सुलेख प्रतियोगिता का आयोजन
हिंदी भाषा के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से एमटीएस कर्मचारियों के लिए सुलेख प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता के माध्यम से कर्मचारियों में हिंदी लेखन के प्रति रुचि विकसित करने और राजभाषा हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग का संदेश दिया गया।
राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 के तहत होंगे कई कार्यक्रम
विश्वविद्यालय में 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक ‘राजभाषा हिंदी उत्सव-2026’ का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से पूरे माह विभिन्न शैक्षणिक, रचनात्मक और प्रतियोगितात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
उत्सव के तहत टिप्पणी एवं प्रारूपण प्रतियोगिता, हिंदी टंकण प्रतियोगिता, राजभाषा सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता और सात दिवसीय हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में परीक्षा नियंत्रक एवं कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. विक्रम सिंह यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर डॉ. नमिता जैसल, डॉ. प्रीति राय, डॉ. शिवशंकर यादव, अन्य शिक्षक, गैर-शिक्षण अधिकारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

