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रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय परिसर में ‘नो व्हीकल डे’ का सफल आयोजन

बरेली, 22 मई।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, प्रदेश की राज्यपाल महामहिम श्रीमती आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के वैश्विक परिप्रेक्ष्य में ऊर्जा संरक्षण एवं जीवनशैली में बदलाव के आह्वान के क्रम में, महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली ने आज पूरे परिसर में “नो व्हीकल डे” का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

कुलपति प्रो. के.पी. सिंह जी के मार्गदर्शन एवं अपील पर आयोजित इस अभियान के तहत आज प्रातः से ही विश्वविद्यालय के सभी प्रवेश द्वारों पर वाहनों का प्रवेश रोककर उन्हें मुख्य द्वार के निकट सुरक्षित स्टैंड पर जमा कराया गया। इसके पश्चात विश्वविद्यालय परिवार (शिक्षकगण, कर्मचारी, छात्र-छात्राएं एवं आगंतुक) परिसर के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान तक केवल ई-कार्ट (इलेक्ट्रिक वाहन) के माध्यम से ही आए-गए। विश्वविद्यालय के कुल सचिव श्री हरीश चंद एवं परीक्षा नियंत्रक श्री संजीव कुमार सिंह ने भी न केवल अपने वाहनों का परित्याग किया बल्कि वह पैदल चलकर ही अपने कार्यालय आए थे।

चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर रविंद्र सिंह एवं सुरक्षा प्रभारी श्री सुधांशु कुमार ने सभी का मुख्य द्वार पर स्वागत किया तथा विद्युत वाहनों के उपयोग का अनुरोध किया। सभी अध्यापकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने इस पहल में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।

कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने इस अवसर पर कहा कि “यह केवल एक प्रयोग नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संकल्प है। आज के ‘नो व्हीकल डे’ ने साबित कर दिया कि जब समाज और विश्वविद्यालय परिवार संकल्पित हो, तो ऊर्जा बचत, जलवायु परिवर्तन तथा आत्मनिर्भर भारत के मार्ग को आसान बनाया जा सकता है। हम सबको सप्ताह में एक दिन, सार्वजनिक वाहनों, कार-पूलिंग, रेल यात्रा, पैदल चलने और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने जैसे सुझावों को जीवन में उतारना चाहिए। यह समय छोटे-छोटे कदमों से बड़ा बदलाव लाने का है।”

विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी से अपील की है कि वे ऊर्जा संरक्षण, ए.सी. का तापमान 24-26 डिग्री रखने, रूफटॉप सोलर, पीएनजी नेटवर्क, स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग और अनावश्यक विद्युत उपकरण बंद करने के निर्देशों का पालन करें। साथ ही विदेश यात्राओं एवं स्टडी टूर को छह माह स्थगित रखने, बैठकें वर्चुअल मोड में करने एवं खाद्य-बर्बादी कम करने का भी निवेदन किया गया।

यह पहल ‘स्वच्छ, हरित एवं आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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