Top Newsउत्तर प्रदेशराज्य

“दृश्य से संवेदना तक” प्रदर्शनी में उभरी युवा फोटोग्राफर्स की रचनात्मक दृष्टि, एक तस्वीर में दिखीं वास्तुकला, संस्कृति और मानवीय भावनाओं की गहराई

लखनऊ में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय के वास्तुकला एवं योजना संकाय (एफओएपी) में युवा फोटोग्राफर्स की रचनात्मक अभिव्यक्ति देखने को मिली। चतुर्थ वर्ष के फोटोग्राफी ऐच्छिक विषय के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित दो दिवसीय फोटोग्राफी प्रदर्शनी “दृश्य से संवेदना तक” का शुभारंभ गुरुवार को हुआ। यह प्रदर्शनी 8 मई तक आयोजित की जाएगी।

प्रदर्शनी का उद्घाटन डीन प्रो. (डॉ.) वंदना सहगल और विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रितु गुलाटी ने किया। इस आयोजन का मार्गदर्शन संकाय समन्वयक आर्किटेक्ट वैभव कुलश्रेष्ठ ने किया।

प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा स्थापत्य, आंतरिक संरचनाओं और शहरी परिवेश को रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही वास्तुकला, शहरी जीवन, संस्कृति, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को दृश्यात्मक अभिव्यक्ति देने वाली कई प्रभावशाली तस्वीरें भी आकर्षण का केंद्र रहीं।

फोटोग्राफी में दिखी तकनीकी दक्षता और संवेदनशील दृष्टि

प्रदर्शनी में प्रदर्शित छायाचित्रों में संरचना, प्रकाश, टेक्सचर, स्थानिक समझ और मनुष्य तथा निर्मित परिवेश के बीच संबंधों को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। तस्वीरों में केवल दृश्य सौंदर्य ही नहीं, बल्कि संवेदनात्मक गहराई भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

डीन प्रो. (डॉ.) वंदना सहगल ने कहा कि ऐसे रचनात्मक माध्यम वास्तुकला की समझ को अधिक संवेदनशील बनाते हैं और दृश्य संप्रेषण को प्रभावशाली स्वरूप प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रयोगधर्मी सोच विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

वहीं विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) रितु गुलाटी ने विद्यार्थियों की कलात्मक दृष्टि, तकनीकी दक्षता और फोटोग्राफी के माध्यम से कथ्य प्रस्तुत करने की क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की रचनाओं में विषय को समझने और उसे दृश्य रूप में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की परिपक्वता दिखाई देती है।

वरिष्ठ फोटोग्राफर्स और कलाकारों ने साझा किए अनुभव

इस अवसर पर वरिष्ठ फोटोग्राफर अतुल हुंडु ने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए विद्यार्थियों को फोटोग्राफी के तकनीकी और कलात्मक पहलुओं की जानकारी दी। कला शिक्षक गिरीश पांडेय ने कहा कि कई विद्यार्थियों की तस्वीरों में नई सोच और नवीन दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता है, जो आने वाले समय की नई कलात्मक दिशा का संकेत है।

कलाकार भूपेंद्र अस्थाना और धीरज यादव ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि फोटोग्राफी केवल दृश्य को कैद करने की कला नहीं, बल्कि समय और संवेदनाओं को महसूस करने की प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि एक संवेदनशील फोटोग्राफर केवल वस्तुओं का चित्र नहीं बनाता, बल्कि वह क्षणों की आत्मा को कैमरे में संजोता है।

उन्होंने कहा कि तस्वीरें कभी किसी चेहरे की खामोशी को आवाज देती हैं, कभी किसी सड़क की वीरानी को कहानी बना देती हैं और कभी किसी बच्चे की मुस्कान पूरे दृश्य को जीवंत कर देती है। फोटोग्राफी दरअसल जीवन के उन क्षणों को अमर करने का माध्यम है, जो समय की भीड़ में कहीं खो जाते हैं।

युवा प्रतिभाओं ने प्रदर्शित की अपनी रचनात्मक कृतियां

कार्यक्रम का समन्वयन गौतम बिंद्रा और ज़ेनब माजिद ने किया। प्रदर्शनी में अंकित वर्मा, अनमोल कुमार श्रीवास्तव, अर्नव पांडेय, अर्नव सिंह, मनु सोनी, मयंक सिंह, मोहम्मद अब्दुल्ला, मोहम्मद बाक़िर शम्शी, रजनेश कुमार, रितिक सिंह, साधना सरगम, साहिल सचान, सक्षम वर्मा, वैभवी सक्सेना, विप्लव सिंह, तिया बनर्जी और साक्षी गोपाल सहित कई विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक फोटोग्राफी कृतियां प्रदर्शित कीं।

इस दौरान सावन शर्मा, दिव्यान्शी श्रीवास्तव, कुशाग्र, एकता, ताबिस अब्दुल्ला, गिरीश पाण्डेय, श्रीयक सिंह समेत संकाय के प्राध्यापक, विद्यार्थी और कला महाविद्यालय के छात्र भी मौजूद रहे।

संकाय समन्वयक आर्किटेक्ट वैभव कुलश्रेष्ठ ने बताया कि इस प्रदर्शनी का उद्देश्य दृश्य कलाओं को प्रोत्साहित करना, वास्तुकला शिक्षा में अंतर्विषयी अध्ययन को बढ़ावा देना और युवा फोटोग्राफर्स को अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए व्यापक मंच उपलब्ध कराना है।

 

---------------------------------------------------------------------------------------------------