गुजरात की सांस्कृतिक झलकियों से सजी रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय की संध्या : गुजराती लोकनृत्य ,लोकगीत, फैशन शो और द्वारकाधीश की नाटिका का शानदार प्रदर्शन

बरेली,02मई। गुजरात स्थापना दिवस के पावन अवसर पर महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कल भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन माननीय कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा एवं माननीय कुलपति प्रो. के. पी. सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। माननीय कुलपति जी ने अभिप्रेरित किया कि गुजरात स्थापना दिवस केवल एक राज्य के गठन का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की विविधता में एकता की भावना का जीवंत उदाहरण है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं और उनमें राष्ट्रीय एकता एवं सांस्कृतिक सम्मान की भावना विकसित करते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की आराधना और विश्वविद्यालय सांस्कृतिक केंद्र समन्वयक डॉ. ज्योति पाण्डेय द्वारा अतिथियों के स्वागत भाषण के साथ हुआ। इसके उपरांत सांस्कृतिक केंद्र के डांस क्लब द्वारा गरबा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति ने वातावरण को उत्साह और उल्लास से भर दिया। सांस्कृतिक केंद्र के पूर्व छात्र-छात्राओं ने गुजरात के पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गुजरात की पावन भूमि द्वारका और द्वारकाधीश की महिमा का उल्लेख करते हुए लघु नाटिका की प्रस्तुति द्वारा गुजरात की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी दर्शाया गया। कृष्ण और सुदामा के जीवन पर आधारित नाटक से मित्रों के मिलन के अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी दृश्य ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।
संगीत क्लब की सुश्री अपर्णा मिश्रा द्वारा हारमोनियम और ढोलक की थाप पर प्रस्तुत गुजराती गीतों की श्रृंखला ने सभी का मन मोह लिया। इसके पश्चात विश्वविद्यालय सांस्कृतिक केंद्र के विद्यार्थियों द्वारा गुजरात की पारंपरिक संस्कृति से लेकर आधुनिक जीवन शैली पर आधारित एक आकर्षक रैंप वॉक प्रस्तुत की गई जिसमें विशेष रूप से नाइजीरिया के छात्रों ने कच्छ क्षेत्र के दृश्य को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रो.पी. बी. सिंह , अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि गुजरात सांस्कृतिक और औद्योगिक रूप से संपन्न क्षेत्र है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के द्वारा विद्यार्थियों के सांस्कृतिक विकास होता है। आप सभी ने जिस उत्साह और समर्पण के साथ इस आयोजन को सफल बनाया है, वह सराहनीय है। भविष्य में भी इसी ऊर्जा के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते रहें। सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ज्योति पाण्डेय ने बताया कि कल्चरल क्लब के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुतियों की तैयारी और प्रदर्शन सराहनीय है। विविध प्रदेशों की संस्कृतियों को जानने और समझने के लिए सांस्कृतिक गतिविधियां सर्वोत्तम मंच होती है। सांस्कृतिक केंद्र में विश्वविद्यालय में अध्ययनरत नाइजीरियन विद्यार्थियों की भी सक्रिय रूप से भागीदारी रहती है। प्रो. अर्चना गुप्ता ने अपने गुजरात के अनुभव साझा किए और वह के जब वह सांस्कृति और कार्यशैली के विषय में बताया । प्रो.सुमित्रा कुकरेती ने विद्यार्थियों की प्रस्तुति की सराहना की। धन्यवाद ज्ञापन डॉ.इंदरप्रीत कौर ने किया। कार्यक्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो . पी. बी.सिंह, सांस्कृतिक समन्वयक डॉ. ज्योति पाण्डेय, डॉ. इंदरप्रीत कौर, प्रो. सुमित्रा कुकरेती, प्रो.अर्चना गुप्ता, प्रो. विनय ऋषीवाल, डॉ. प्रिया सक्सेना, डॉ. अतुल सरोजवाल तथा डॉ. रीना पंत,रॉबिन बालियान, श्री अनंत मिश्रा, श्री आनंद सिंह अधिकारी सहित विभागाध्यक्ष , संकायाध्यक्ष, शिक्षक अधिकारी, कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।कार्यक्रम का सफल संचालन अक्षिता पाराशरी द्वारा किया गया, जबकि लवी, निष्ठा ,आदर्श, श्रेय रस्तोगी, महक, पीयूष, अथर्व, एवं दिव्यांश ने आयोजन को सहयोग किया।


बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
