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जब लाहौर पहुंचकर फूट-फूटकर रो पड़े थे देव आनंद! कॉलेज की दीवारों को पकड़ छलक पड़े आंसू, 50 साल पुरानी यादें हुईं ताजा

नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा के सदाबहार अभिनेता देव आनंद का जीवन जितना शानदार रहा, उतना ही भावुक भी। साल 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती का संदेश लेकर निकली ऐतिहासिक बस यात्रा के दौरान एक ऐसा पल सामने आया था, जिसने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया। लाहौर पहुंचते ही देव आनंद अपनी पुरानी यादों में इस कदर खो गए कि उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे थे लाहौर

साल 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भारत-पाकिस्तान संबंधों में नई शुरुआत के उद्देश्य से बस यात्रा पर लाहौर पहुंचे थे। इस विशेष प्रतिनिधिमंडल में फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता देव आनंद भी शामिल थे। पाकिस्तान पहुंचने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया था।

पुराने कॉलेज को देखकर भावुक हो गए अभिनेता

लाहौर वही शहर था, जहां देव आनंद ने अपने छात्र जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष बिताए थे। उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की पढ़ाई की थी। वर्षों बाद जब वह अपने पुराने कॉलेज परिसर पहुंचे तो बीते दिनों की यादें अचानक ताजा हो गईं। बताया जाता है कि कॉलेज की इमारत, दीवारों और दरवाजों को देखते ही वह भावुक हो उठे। उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वे काफी देर तक खुद को संभाल नहीं पाए।

‘उषा’ का नाम लेते ही याद आया पहला प्यार

कॉलेज यात्रा के दौरान देव आनंद ने अपने छात्र जीवन की एक खास याद भी साझा की। उन्होंने भावुक होकर “उषा” का नाम लिया, जिनसे वह युवावस्था के दिनों में बेहद लगाव रखते थे। पुराने दिनों और अधूरी यादों ने उस पल को और भी भावुक बना दिया।

विभाजन ने छीन लिया था जन्मस्थान

देव आनंद का पूरा नाम धर्मदेव पिशोरीमल आनंद था। उनका जन्म अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के शकरगढ़ क्षेत्र में हुआ था। देश के विभाजन के बाद यह इलाका पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। यही वजह थी कि पाकिस्तान की यात्रा उनके लिए सिर्फ एक विदेश दौरा नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और यादों से दोबारा मिलने जैसा अनुभव था।

30 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे, बने सिनेमा के सुपरस्टार

साल 1943 में देव आनंद महज 30 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे थे। संघर्ष के दिनों से शुरुआत करने वाले इस अभिनेता ने आगे चलकर भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और कई यादगार किरदारों के जरिए दर्शकों के दिलों पर राज किया।

भारत ही नहीं, पाकिस्तान में भी थी जबरदस्त लोकप्रियता

देव आनंद की लोकप्रियता सीमाओं से परे थी। भारत के साथ-साथ पाकिस्तान और दुनिया के कई देशों में भी उनके प्रशंसकों की बड़ी संख्या थी। उनकी अदाकारी, व्यक्तित्व और जीवनशैली ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में शामिल कर दिया।

 

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