राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 के अन्तर्गत कराये अदालतों में लंबित मामलों का आपसी सहमति से निस्तारण

बरेली 17 सितंबर। मीडियेशन एवं कंसीलियेशन प्रोजेक्ट कमेटी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बरेली के तत्वावधान में एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बरेली श्री प्रदीप कुमार सिंह के कुशल नेतृत्व में जनपद बरेली में ‘‘राष्ट्र के लिये मध्यस्थता अभियान-3.0‘‘ का आयोजन किया जा रहा है। माननीय सर्वाेच्च न्यायालय की मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति (एम0सी0पी0सी0) द्वारा स्वीकृत इस राष्ट्रव्यापी विशेष अभियान के तहत 1 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक अदालतों में लंबित योग्य मामलों की पहचान, प्री-मीडियेशन स्क्रीनिंग और सम्बन्धित पक्षों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया की जाएगी। इसके बाद, 1 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक मुख्य मध्यस्थता चरण चलेगा, जिसके तहत वैवाहिक मामले, डी0वी0 एक्ट के मामले और 498ए0 आई0पी0सी0/ 85 बी0एन0एस0 के मामले, दुर्घटना क्लेम के मामले, चेक बाउंस के मामले, आपराधिक समझौते योग्य मामले, उपभोक्ता विवाद के मामले, कर्ज वसूली के मामले, आदेश के पालन (एक्जीक्यूशन) से जुड़े मामले, मध्यस्थता (आर्बिट्रेशन) के मामले, कमर्शियल विवाद, नौकरी/सेवा से जुड़े मामले, संपत्ति बंटवारे के मामले, बेदखली के मामले, भूमि अधिग्रहण के मामले, लेबर एक्ट के मामले, सिविल मामलें तथा अन्य उपयुक्त लंबित मामलों का आपसी समझौते के आधार पर बिना लंबी कानूनी लड़ाई के त्वरित, निष्पक्ष और कम खर्चे में स्थायी समाधान कराया जाएगा। आम जनता की सुविधा के लिए इस 90 दिवसीय अभियान में ऑफलाइन, ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में मध्यस्थता की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बरेली के प्रभारी सचिव, श्री सुव्रत पाठक, अपर सिविल जज (सी.डि.)-प्रथम, बरेली ने जनपद के समस्त नागरिकों, अधिवक्ताओं और समाजसेवियों से अपील करते हुए कहा, कि वर्षों पुराने मुकदमों और अंतहीन अदालती चक्करों को हमेशा के लिए समाप्त करने का यह एक स्वर्णिम अवसर है। मध्यस्थता हार-जीत का नहीं, बल्कि आपसी रिश्तों को वापस जोड़ने का माध्यम है। आमजन आगे आएं और इस ऐतिहासिक एवं जन-कल्याणकारी अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपने विवादों को हंसते-मुस्कुराते सुलझाएं। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
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